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गुजरात के बंदरगाहों से ड्रग्स की खेप पर भगवंत मान ने उठाए सवाल

पंजाब में नशा तस्करी लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रही है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सीमा और संगठित तस्करी के नेटवर्क के कारण इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस, सीमा सुरक्षा बल, सीमा शुल्क विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है।

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  • October 23, 2026 3:00 pm IST, Published 1 hour ago

चंडीगढ़: पंजाब में नशा तस्करी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए अकाली दल और भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच पंजाब में नशे के बड़े नेटवर्क विकसित हुए। मान ने गुजरात के बंदरगाहों के जरिए कथित तौर पर बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी खेप देश में कैसे पहुंच रही है। उनके इस बयान से पंजाब में नशे के कारोबार और इसकी रोकथाम को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या को समझने के लिए पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 2007 से 2017 के बीच अकाली दल और भाजपा की गठबंधन सरकार के समय नशे के कारोबार ने बड़े स्तर पर पैर पसारे। मान के मुताबिक, उस दौरान कथित तौर पर कई बड़े तस्करों ने प्रभावशाली नेताओं और मंत्रियों के साथ संबंधों का जिक्र किया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।

मान ने नशे की आपूर्ति के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए गुजरात के बंदरगाहों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब की सीमा पाकिस्तान से लगती है और वहां से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन बंदरगाहों पर सीमा शुल्क विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी होने के बावजूद यदि हजारों किलोग्राम मादक पदार्थ पहुंचता है, तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी खेप सुरक्षा व्यवस्था से बचकर कैसे निकल जाती है। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में दावा किया कि गुजरात से नशीले पदार्थों की आपूर्ति का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से उठाया जाना चाहिए। उन्होंने बंदरगाहों पर सुरक्षा इंतजामों और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, जब किसी बंदरगाह पर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ पकड़ा जाता है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि उसकी खेप कहां से आई, उसके पीछे कौन लोग थे और तस्करी के नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।

पंजाब में नशा तस्करी लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रही है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सीमा और संगठित तस्करी के नेटवर्क के कारण इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस, सीमा सुरक्षा बल, सीमा शुल्क विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। बड़ी खेपों की बरामदगी के मामलों में केवल पदार्थ जब्त करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरे आपूर्ति नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच भी जरूरी होती है। मान के बयान का राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल को निशाने पर लेकर नशे के मुद्दे पर विपक्ष की जवाबदेही का सवाल उठाया। वहीं, गुजरात का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश में नशीले पदार्थों की आपूर्ति और बंदरगाहों की सुरक्षा पर भी सवाल किए। हालांकि, उनके आरोपों को संबंधित जांच एजेंसियों के निष्कर्षों से अलग रखकर देखना जरूरी है। किसी राजनीतिक बयान के आधार पर किसी व्यक्ति, दल या राज्य की संलिप्तता को स्वतः प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए तस्करी के रास्तों की पहचान, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे कदम अहम हैं। पंजाब में इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच और कार्रवाई की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान ने एक बार फिर नशा तस्करी को लेकर पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में बहस को केंद्र में ला दिया है। अब इस विषय पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई, उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नशे की आपूर्ति के नेटवर्क किस तरह काम कर रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।

 

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