बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जुड़वा बच्चों की देखभाल और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय जेल बिलासपुर में तैनात महिला प्रहरी मंदा तिवारी को 80 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को पारित फैसले में कहा कि बच्चों की कम उम्र और उनकी चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए महिला कर्मचारी को अतिरिक्त अवकाश दिया जाना उचित है। अदालत के इस आदेश से पहले संबंधित अधिकारी ने उन्हें केवल 20 दिन की छुट्टी मंजूर की थी।
मंदा तिवारी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कुल 120 दिन की बाल देखभाल छुट्टी देने की मांग की थी। उनकी ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मंदा तिवारी की नियुक्ति 18 सितंबर 2006 को बिलासपुर केंद्रीय जेल में महिला प्रहरी के पद पर हुई थी। उनके यहां 10 सितंबर 2025 को जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ था। बच्चों की देखभाल के लिए उन्हें 13 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक अवकाश दिया गया था। इसके बाद भी बच्चों की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने अतिरिक्त छुट्टी की मांग की।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि बच्चों की उम्र कम है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण नियमित रूप से चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसे में उनकी देखभाल के लिए मां की उपस्थिति जरूरी है। अधिवक्ता के मुताबिक, इससे पहले हाई कोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए मंदा तिवारी को 60 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद बच्चों की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने आगे भी अवकाश की मांग की।
मामले में सक्षम अधिकारी ने एक अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर केवल 20 दिन की अतिरिक्त छुट्टी स्वीकृत की थी। इसके बाद मंदा तिवारी ने हाई कोर्ट का रुख किया। उनकी याचिका में कहा गया कि बच्चों की उम्र और चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए अधिक समय तक छुट्टी मिलनी चाहिए, ताकि वे उनकी उचित देखभाल कर सकें।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित अधिकारी पहले ही 20 दिन का अवकाश मंजूर कर चुका है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, लागू सेवा नियमों और प्रस्तुत चिकित्सकीय दस्तावेजों पर विचार किया। इसके बाद पीठ ने माना कि बच्चों की कम उम्र और उनकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त छुट्टी की जरूरत है। हाई कोर्ट ने पहले मंजूर 20 दिन के अवकाश के अतिरिक्त 80 दिन की बाल देखभाल छुट्टी देने का निर्देश दिया और याचिका स्वीकार कर ली।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 38-ग के तहत महिला सरकारी कर्मचारियों को पूरी सेवावधि में अधिकतम 730 दिन की बाल देखभाल छुट्टी देने का प्रावधान है। नियमों के मुताबिक, एक कैलेंडर वर्ष में ऐसी छुट्टी तीन बार से अधिक नहीं दी जा सकती। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को बच्चों की देखभाल से जुड़ी जरूरतों के लिए निर्धारित परिस्थितियों में अवकाश उपलब्ध कराना है।
हाई कोर्ट के इस फैसले में बच्चों की उम्र, स्वास्थ्य और देखभाल की जरूरतों को महत्वपूर्ण माना गया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से मंदा तिवारी को अपने जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। अब संबंधित विभाग को अदालत के निर्देश के अनुरूप अवकाश की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।