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टाटा समूह में बढ़ी खींचतान, राहुल गांधी ने मोदी-शाह पर साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम में टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। कंपनी को सूचीबद्ध करने की संभावना और समूह के प्रबंधन से जुड़े सवालों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद की खबरें पहले से सामने आती रही हैं। ऐसे में नेतृत्व संबंधी विवाद का असर कंपनी की भविष्य की रणनीति और कॉरपोरेट प्रशासन पर...

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  • October 28, 2026 1:09 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: टाटा समूह में नेतृत्व और कॉरपोरेट प्रशासन को लेकर चल रही खींचतान के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विवाद पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा समूह को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और देश के बड़े कारोबारी इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। राहुल गांधी ने कारोबारी जगत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर उद्योग जगत कब तक इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने से बचता रहेगा।

यह विवाद टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को लेकर सामने आया है। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस और उसकी सबसे बड़ी शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच नेतृत्व, संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग और कंपनी के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने समूह के प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने टाटा समूह को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप लगाते हुए बड़े कारोबारियों से सवाल किया कि वे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। राहुल गांधी के बयान के केंद्र में यह सवाल रहा कि देश के प्रमुख कारोबारी समूहों से जुड़े मामलों में उद्योग जगत अपनी बात रखने से क्यों हिचक रहा है। हालांकि, टाटा समूह को जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

टाटा संस में विवाद की मुख्य वजह चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए फिर से अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 17 सितंबर को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रस्ताव के अनुसार, उनका नया कार्यकाल 21 फरवरी 2027 से शुरू होना था। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इस निर्णय की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर बैठक से जुड़े कई दस्तावेज मांगे। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विषय बैठक के मूल एजेंडे में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं था। उन्होंने चयन समिति के गठन, आवश्यक मंजूरियों और मतदान की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। इसके अलावा, उन्होंने बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, अंतिम कार्यवाही विवरण और प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में दोनों संस्थाओं के बीच मतभेद का महत्व केवल अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। यह कंपनी के निर्णय लेने के अधिकार, निदेशक मंडल की कार्यप्रणाली और प्रमुख शेयरधारक की भूमिका से भी जुड़ा हुआ है। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि नियुक्ति के मामले में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी आंतरिक नियमों का पालन आवश्यक है।

दूसरी ओर, टाटा संस ने पहले नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज करते हुए पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को वैध बताया था। कंपनी का पक्ष है कि संबंधित नियमों की उसकी व्याख्या के अनुसार निदेशक मंडल का निर्णय उचित है। इस तरह विवाद का केंद्र यह है कि नियुक्ति के लिए किस प्रक्रिया और मतदान व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मतभेद का कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। इस पूरे घटनाक्रम में टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। कंपनी को सूचीबद्ध करने की संभावना और समूह के प्रबंधन से जुड़े सवालों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद की खबरें पहले से सामने आती रही हैं। ऐसे में नेतृत्व संबंधी विवाद का असर कंपनी की भविष्य की रणनीति और कॉरपोरेट प्रशासन पर होने वाली चर्चाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी संभावित प्रभाव के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।

राहुल गांधी के बयान ने इस कॉरपोरेट विवाद को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कारोबारी जगत पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और विवाद से जुड़े तथ्यों का स्वतंत्र आकलन महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच नेतृत्व तथा निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद जारी हैं। नोएल टाटा की आपत्तियों, कंपनी के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही विवाद के कानूनी तथा प्रशासनिक पहलुओं पर अधिक स्पष्टता आ सकेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाते हैं या मामला कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ता है।

 

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