नयी दिल्लीः विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव परिणामों पर किए गए ट्वीट को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें थोड़ा इंतजार करना चाहिए था। खेड़ा ने वाराणसी और नागपुर में बीजेपी को मिली हार का जिक्र करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की चुनौती दी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रोकने की मांग भी उठाई।
पवन खेड़ा ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उन्हें दया आती है और उन्हें चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ समय इंतजार करना चाहिए था। कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी विधान परिषद चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर आई है। उन्होंने वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के गृह क्षेत्र से जुड़ी इस सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उन्होंने नागपुर में बीजेपी की हार का जिक्र करते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रभाव वाले क्षेत्र से जुड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बताया।
खेड़ा ने अपने बयान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस का रुख भी दोहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाने के पक्ष में चुनौती देने को तैयार है। उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनाव मतपत्रों के जरिए कराए जाएं तो क्या सत्तारूढ़ पक्ष इसके लिए तैयार होगा। उनके बयान का मुख्य केंद्र चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मतदान प्रणाली और उसकी पारदर्शिता को लेकर विपक्ष की मांग रही।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR की प्रक्रिया रोकने की मांग पर भी विचार होना चाहिए। SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची की विस्तृत जांच और संशोधन किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। विपक्षी दल कई जगह इसके क्रियान्वयन और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को दुरुस्त करने के उद्देश्य से ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।
विधान परिषद चुनावों के नतीजों ने बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की थी। वहीं, महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार विजय दर्ज की। इन परिणामों का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेता बीजेपी के प्रदर्शन पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव सीमित और विशेष मतदाता समूहों पर आधारित होते हैं, इसलिए उनके नतीजों को सीधे तौर पर सभी चुनावों के रुझान के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
पवन खेड़ा की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मतदान प्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाती रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना और मतदाता सूची को अद्यतन रखना है।
खेड़ा ने अपने बयान के जरिए प्रधानमंत्री और बीजेपी को चुनाव प्रक्रिया पर खुली बहस की चुनौती दी है। उनके वक्तव्य पर बीजेपी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। फिलहाल, एमएलसी चुनाव के नतीजे और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग राजनीतिक चर्चा के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।