उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में आधी रात स्कैनिंग क्यों?

उज्जैन में प्राचीन प्रतिमा के आधार की गहराई जानने पहुंची भोपाल की विशेषज्ञ टीम, डेढ़ घंटे तक चली तकनीकी जांच; प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 30, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

उज्जैन, मध्य प्रदेश। धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंदिर की प्राचीन प्रतिमा की आधी रात को आधुनिक मशीनों से स्कैनिंग किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे भोपाल से पहुंची तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने मंदिर परिसर में प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की जांच की। इस दौरान एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सहायता से स्कैनिंग की।

इस जांच का प्रमुख उद्देश्य प्रतिमा के आधार की वास्तविक गहराई और जमीन के नीचे मौजूद संरचना का पता लगाना बताया जा रहा है। हालांकि, जांच के बाद प्रशासन की ओर से विस्तृत रिपोर्ट या आगे की कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

डेढ़ महीने बाद फिर चर्चा में आया मंदिर का मामला

उज्जैन का खड़े हनुमान मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। यहां स्थापित भगवान हनुमान की लगभग आठ फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा लंबे समय से श्रद्धालुओं के दर्शन का प्रमुख केंद्र रही है। लेकिन कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर सड़क चौड़ीकरण की योजना के कारण मंदिर का मामला विवादों में आ गया।

सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में कई मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल आए थे। इसी क्रम में खड़े हनुमान मंदिर के मुख्य ढांचे को भी हटाने की कार्रवाई की गई। सितंबर 2026 में मंदिर के ऊपरी हिस्से और बाद में मुख्य ढांचे को हटाया गया। इसके बाद से भगवान हनुमान की प्राचीन प्रतिमा को अस्थायी रूप से टेंट और कैनोपी के नीचे सुरक्षित रखा गया है।

मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के लगभग डेढ़ महीने बाद भी प्रतिमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसी बीच भोपाल से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के पहुंचने और आधी रात को स्कैनिंग किए जाने से यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया है।

मशीनों से क्या पता लगाने की कोशिश कर रहा प्रशासन?

विशेषज्ञों द्वारा की गई स्कैनिंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा का आधार बताया जा रहा है। तकनीकी टीम यह जानने का प्रयास कर रही थी कि प्रतिमा जमीन के भीतर कितनी गहराई तक स्थापित है और उसके नीचे किस प्रकार की संरचना मौजूद है।

दरअसल, किसी प्राचीन प्रतिमा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने से पहले उसकी संरचना, वजन, आधार और आसपास की जमीन की स्थिति का आकलन करना जरूरी होता है। यदि प्रतिमा का आधार जमीन के भीतर काफी गहराई तक है, तो उसे सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए विशेष तकनीकी योजना की आवश्यकता पड़ सकती है।

ऐसे में आधुनिक मशीनों से स्कैनिंग के जरिए जमीन के भीतर की स्थिति समझने का प्रयास किया गया। इससे प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना भविष्य की संभावित कार्रवाई की योजना बनाने में तकनीकी सहायता मिल सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों की जांच का अंतिम परिणाम अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि स्कैनिंग के आधार पर प्रतिमा को स्थानांतरित करने का रास्ता साफ हो गया है।

रात में जांच कराने पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल

इस पूरी कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता का मुद्दा भी उठने लगा है। भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने देर रात तकनीकी टीम के मंदिर पहुंचने और प्रतिमा की स्कैनिंग किए जाने पर सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि भगवान हनुमान की प्राचीन प्रतिमा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे संवेदनशील मामले में प्रशासन को अपनी मंशा और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि प्रतिमा की तकनीकी जांच कराई जा रही है तो इसके उद्देश्य, प्रक्रिया और परिणामों के बारे में भी लोगों को बताया जाना चाहिए।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि जब प्रतिमा से जुड़ा मामला इतना संवेदनशील है, तो जांच की प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया जा रहा है।

स्कैनिंग के दौरान मशीनों की बैटरी को लेकर भी चर्चा

सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में स्कैनिंग के दौरान तकनीकी उपकरणों की बैटरी डिस्चार्ज होने की बात भी सामने आई है। कुछ स्थानीय लोगों की ओर से इसे लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई प्रमाणित तकनीकी रिपोर्ट या प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इसलिए उपकरणों के बंद होने या बैटरी डिस्चार्ज होने की घटना को किसी चमत्कार अथवा असामान्य घटना के रूप में प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। इसके वास्तविक कारणों की जानकारी संबंधित तकनीकी विशेषज्ञ ही दे सकते हैं।

पहले भी हो चुकी है प्रतिमा की तकनीकी जांच

खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा के आधार और जमीन के नीचे की संरचना को समझने के लिए इससे पहले भी तकनीकी जांच कराई जा चुकी है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को आईआईटी इंदौर की टीम ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक की सहायता से स्कैनिंग की थी।

इस तकनीक के माध्यम से जमीन के भीतर मौजूद संरचनाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद अब भोपाल से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से प्रतिमा के आधार और आसपास के हिस्से की जांच की है।

लगातार हो रही तकनीकी जांच से स्पष्ट है कि प्रतिमा की संरचना और उसके आधार को समझना प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। हालांकि, दोनों जांचों के निष्कर्षों को सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है, ताकि लोगों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

श्रद्धालुओं की मांग, आस्था और सुरक्षा को मिले प्राथमिकता

खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ा मामला केवल सड़क चौड़ीकरण या निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है। यह हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और शहर की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है।

स्थानीय श्रद्धालुओं की मांग है कि प्राचीन प्रतिमा के संबंध में कोई भी निर्णय लेते समय उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाए। प्रतिमा को सुरक्षित रखना और उसके ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को ध्यान में रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रशासन की ओर से प्रतिमा को टंकी चौक के पास बनाए गए नए मंदिर में स्थापित करने की योजना की चर्चा भी सामने आई है। लेकिन प्रतिमा को कब और किस तकनीकी प्रक्रिया से स्थानांतरित किया जाएगा, इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार है।

अब तकनीकी रिपोर्ट पर टिकी सभी की नजरें

भोपाल की विशेषज्ञ टीम द्वारा की गई डेढ़ घंटे की स्कैनिंग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आया है। क्या प्रतिमा का आधार जमीन में अपेक्षा से अधिक गहराई तक मौजूद है? क्या उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है? और क्या प्रशासन आगे कोई नई योजना तैयार करेगा?

इन सभी सवालों के जवाब तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासन के आधिकारिक बयान के बाद ही मिल सकेंगे।

फिलहाल उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर की प्राचीन प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता बनी हुई है। लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस मामले में जल्द स्थिति स्पष्ट करे और ऐसा समाधान निकाले, जिसमें भगवान हनुमान की प्रतिमा की सुरक्षा, धार्मिक आस्था और शहर के विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बना रहे।

Advertisement