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हरियाणा में SIR की समयसीमा बढ़ी, अब 30 नवंबर को आएगी अंतिम मतदाता सूची

एसआईआर की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके माध्यम से निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि मतदाता सूची में सही और पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज हों। कई बार मतदाता स्थान बदलने, मृत्यु, दोहरे पंजीकरण या अन्य कारणों से सूची में गलतियां रह जाती हैं। विशेष पुनरीक्षण

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  • October 30, 2026 9:00 pm IST, Published 1 hour ago

चंडीगढ़: हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने इस अभियान की समयसीमा बढ़ाते हुए दावे और आपत्तियों के निपटारे के लिए 20 नवंबर 2026 तक का समय निर्धारित किया है। इसके साथ ही मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख में भी बदलाव किया गया है। अब हरियाणा की संशोधित मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। निर्वाचन आयोग की ओर से 29 अक्टूबर को जारी आदेश में इस संबंध में नया कार्यक्रम घोषित किया गया है।

आयोग के इस फैसले के बाद राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों के लिए अधिकारियों और नागरिकों को अतिरिक्त समय मिल सकेगा। विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और अपात्र नामों को सूची में बनाए रखने की स्थिति न बने।

निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या किसी प्रविष्टि में सुधार से संबंधित दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख अब 20 नवंबर तय की गई है। इससे पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन अब आयोग ने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों की जांच कर उनका निस्तारण करना होगा। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 नवंबर 2026 को किया जाएगा। इसका मतलब है कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित सूची तैयार की जाएगी और निर्धारित तारीख को सार्वजनिक किया जाएगा। इस सूची में उन सभी बदलावों को शामिल किया जाएगा, जो जांच और सत्यापन के बाद सही पाए जाएंगे।

एसआईआर की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके माध्यम से निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि मतदाता सूची में सही और पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज हों। कई बार मतदाता स्थान बदलने, मृत्यु, दोहरे पंजीकरण या अन्य कारणों से सूची में गलतियां रह जाती हैं। विशेष पुनरीक्षण के दौरान इन त्रुटियों को दूर करने का अवसर मिलता है। हरियाणा के मतदाताओं के लिए भी यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। जिन नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे निर्धारित नियमों के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, यदि किसी मतदाता को सूची में दर्ज नाम, पता या अन्य विवरण में गलती दिखाई देती है तो वह सुधार के लिए दावा प्रस्तुत कर सकता है। किसी अपात्र नाम या गलत प्रविष्टि को लेकर भी नियमानुसार आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।

निर्वाचन आयोग की ओर से समयसीमा बढ़ाए जाने का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे मतदाताओं को अपने विवरण की जांच करने और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेगा। साथ ही चुनाव से जुड़े अधिकारियों को भी प्राप्त दावों और आपत्तियों का नियमानुसार सत्यापन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

आयोग ने 29 अक्टूबर को जारी आदेश के माध्यम से संशोधित कार्यक्रम की जानकारी दी है। यह आदेश अवर सचिव संदीप कुमार की ओर से जारी किया गया है। नए कार्यक्रम के अनुसार अब 20 नवंबर तक दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा, जबकि 30 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। कुल मिलाकर हरियाणा में एसआईआर की समयसीमा बढ़ने से मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में बदलाव आया है। अब राज्य के नागरिकों के पास अपने नाम और अन्य विवरणों की जांच करने तथा आवश्यक सुधार कराने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध रहेगा। निर्वाचन आयोग का यह कदम मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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