यह मामला भिवानी निवासी सुनीता और अन्य कर्मचारियों की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि अंशकालिक कर्मचारी के रूप में सरकारी सेवा में बिताए गए वर्षों को भी पेंशन संबंधी लाभों की गणना में शामिल किया जाए। उनका कहना था कि उन्होंने नियमित होने से काफी पहले सरकारी स्कूलों में काम करना शुरू कर दिया था और लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी थीं। ऐसे में केवल नियमितीकरण की तारीख से उनकी पेंशन योग्य सेवा की गणना करना उचित नहीं है।
याचिका के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की नियुक्तियां हरियाणा के विभिन्न सरकारी स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के अंशकालिक कर्मचारियों के रूप में वर्ष 1980 से 2002 के बीच हुई थीं। लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें 11 नवंबर 2003 की नियमितीकरण नीति के तहत नियमित किया गया। इसके बाद पेंशन व्यवस्था को लेकर लागू किए गए नए नियमों के कारण उनकी शुरुआती सेवा की गणना का मुद्दा सामने आया। नई पेंशन योजना को 28 अक्टूबर 2005 को अधिसूचित किया गया था और इसे एक जनवरी 2006 से लागू किया गया। कर्मचारियों ने अदालत में दलील दी कि उनकी सरकारी सेवा नई पेंशन व्यवस्था लागू होने से पहले ही शुरू हो गई थी। इसलिए नियमितीकरण से पहले की गई उनकी निरंतर सेवा को भी पेंशन संबंधी लाभ तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने स्वीकार किया कि संबंधित कर्मचारी पहले अंशकालिक आधार पर नियुक्त हुए थे और बाद में उन्हें नियमित किया गया। अदालत ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड बनाम सतनाम सिंह फैसले का भी उल्लेख किया। इस फैसले के संदर्भ में हाईकोर्ट ने निरंतर सेवा और बाद में हुए नियमितीकरण के आधार पर कर्मचारियों के पेंशन संबंधी दावे पर विचार करने की जरूरत को रेखांकित किया। अदालत का कहना था कि लंबे समय तक लगातार सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को केवल नियुक्ति की तकनीकी श्रेणी के आधार पर पेंशन लाभ से वंचित करने का दृष्टिकोण उचित नहीं माना जा सकता। अंशकालिक, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी आधार पर की गई सेवा की प्रकृति और निरंतरता को ध्यान में रखते हुए संबंधित तथ्यों की जांच करना जरूरी है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को उनकी शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आवश्यक तथ्यों की पुष्टि के बाद कर्मचारियों की पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों का दोबारा निर्धारण किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर देय लाभ जारी किए जाने चाहिए। नई पेंशन योजना के तहत पहले से जमा की गई या भुगतान की गई राशि का समायोजन लागू कानून और नियमों के अनुसार किया जाएगा। इस फैसले को हरियाणा के उन सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने नियमित होने से पहले लंबे समय तक विभिन्न अस्थायी व्यवस्थाओं के तहत काम किया था। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक लाभ उसकी नियुक्ति, सेवा की निरंतरता, नियमितीकरण की तारीख और लागू नियमों के सत्यापन पर निर्भर करेगा। अदालत के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग को इन तथ्यों की जांच करके पात्र कर्मचारियों के पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के बारे में आगे की कार्रवाई करनी होगी।