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अखिलेश यादव का स्वामी प्रसाद मौर्य को झटका, INDIA गठबंधन में एंट्री पर लगाई रोक

अखिलेश यादव के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि INDIA गठबंधन में किसी नए दल या नेता की एंट्री केवल कांग्रेस की पहल पर तय नहीं होगी। इसमें समाजवादी पार्टी की सहमति भी महत्वपूर्ण हो

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Gauravshali Bharat News
  • October 30, 2026 6:10 pm IST, Published 1 hour ago

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी समय है, लेकिन विपक्षी दलों के बीच गठबंधन, सीटों के बंटवारे और नए राजनीतिक साथियों को जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। इसी बीच INDIA गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जता रहे पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से बड़ा झटका लगा है। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं बन सकते। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव से स्वामी प्रसाद मौर्य के INDIA गठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर सपा प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन में शामिल नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि मौर्य उनकी सीटों में भी नहीं आते हैं। अखिलेश के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर संभावित सहयोगियों को लेकर समाजवादी पार्टी के रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी नई भूमिका तलाश रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने 3 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस बैठक में कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद थे। मुलाकात के बाद मौर्य ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने INDIA गठबंधन के साथ आने की अपनी मंशा भी स्पष्ट की थी। हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी साफ किया था कि उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की कोई योजना नहीं है। वह अपनी अलग राजनीतिक पहचान और पार्टी को बनाए रखते हुए गठबंधन के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं।

उनका मानना है कि विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरें तो भाजपा को मजबूत चुनौती दी जा सकती है। राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान जिन मुद्दों पर सहमति की बात सामने आई थी, उनमें बेरोजगारी, महंगाई, आरक्षण और सामाजिक न्याय प्रमुख हैं। मौर्य का कहना रहा है कि इन विषयों पर उनकी राजनीतिक सोच कांग्रेस से मेल खाती है। इसी आधार पर वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं। लेकिन अखिलेश यादव के ताजा बयान ने उनकी गठबंधन में संभावित एंट्री को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में INDIA गठबंधन की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दोनों पार्टियां अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं। ऐसे में सीटों का बंटवारा और नए सहयोगियों को शामिल करना गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है। स्वामी प्रसाद मौर्य की राजनीतिक स्थिति भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम है। वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ उनका जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनकी राजनीतिक ताकत और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस की ओर से उन्हें साथ लाने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन समाजवादी पार्टी की असहमति के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

अखिलेश यादव के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि INDIA गठबंधन में किसी नए दल या नेता की एंट्री केवल कांग्रेस की पहल पर तय नहीं होगी। इसमें समाजवादी पार्टी की सहमति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, अभी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और सहयोगियों को लेकर अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य आगे किस राजनीतिक रास्ते को चुनते हैं। क्या कांग्रेस उन्हें गठबंधन में शामिल कराने के लिए कोई पहल करेगी या मौर्य अपनी अलग रणनीति के साथ 2027 के चुनाव की तैयारी करेंगे? फिलहाल अखिलेश यादव के बयान ने उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों में एक नई राजनीतिक चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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