उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शासन और प्रशासन की चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सिविल सेवकों को नई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी कार्यशैली और क्षमताओं में सुधार करना होगा। प्रशासनिक अधिकारियों को तकनीकी बदलावों, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक परिस्थितियों को समझते हुए निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। इसके साथ ही जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देना और उनके समाधान के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए आर्थिक गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में पर्यावरणीय स्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विकास की ऐसी नीति अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें उद्योग, बुनियादी ढांचे, रोजगार और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। सी. पी. राधाकृष्णन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से विशेष आग्रह किया कि संस्थान देश के सिविल सेवकों को विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था, कुशल प्रशासन और दूरदर्शी नेतृत्व भी आवश्यक है।
IIPA जैसे संस्थानों की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षण, शोध और नीतिगत विचार-विमर्श के माध्यम से बेहतर शासन के लिए तैयार किया जाता है। संस्थान को चाहिए कि वह भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर ध्यान दे। इससे सिविल सेवकों को बदलती जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनाया जा सकेगा।

इस वार्षिक बैठक में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी शामिल हुए। वह IIPA की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ संस्थान के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े, आम सभा और कार्यकारी परिषद के सदस्य, फैकल्टी सदस्य तथा विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय शाखाओं के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी और अन्य गणमान्य अतिथि भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान संस्थान की गतिविधियों और सार्वजनिक प्रशासन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इस आयोजन में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जनोन्मुखी बनाने, अधिकारियों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार संस्थागत क्षमता विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषय केंद्र में रहे। उपराष्ट्रपति का संबोधन ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ कुशल प्रशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है। ऐसे में IIPA से अपेक्षा की जा रही है कि वह भविष्य के प्रशासनिक नेतृत्व को तैयार करने और देश में बेहतर शासन व्यवस्था विकसित करने में अपनी भूमिका और मजबूत करे।