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काशी के अन्नपूर्णा मंदिर में बरसेगा खजाना, भक्तों को मिलेगा लाखों का प्रसाद

वाराणसी : धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में दीपावली का पर्व हर साल विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन यहां स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर की दीपावली एक अलग ही परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में अनाज और मिठाई ही नहीं, […]

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  • November 5, 2026 11:25 am IST, Published 2 hours ago

वाराणसी : धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में दीपावली का पर्व हर साल विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन यहां स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर की दीपावली एक अलग ही परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में अनाज और मिठाई ही नहीं, बल्कि सिक्के भी वितरित किए जाते हैं। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों के घरों को धन-धान्य से भर देती हैं। यही वजह है कि दीपावली के अवसर पर यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचती है।

इस वर्ष भी मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से लेकर अन्नकूट महोत्सव तक विशेष धार्मिक आयोजनों की तैयारी की खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच लगभग 8 से 10 लाख रुपये मूल्य के सिक्के वितरित करने की तैयारी बताई गई है। हालांकि, इस राशि और वितरण की अंतिम आधिकारिक पुष्टि मंदिर प्रशासन से किया जाना आवश्यक है।

धनतेरस से अन्नकूट तक होंगे मां के स्वर्णमयी दर्शन

मंदिर की परंपरा के अनुसार, मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन वर्ष में विशेष अवसर पर ही श्रद्धालुओं को प्राप्त होते हैं। इस वर्ष 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक पांच दिवसीय धार्मिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। धनतेरस के दिन से दर्शन और विशेष पूजन का सिलसिला शुरू होगा। 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के साथ इस आयोजन का समापन होगा। मंदिर की ओर से जारी जानकारी में भी इन तारीखों की पुष्टि की गई है।

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन हैं। श्रद्धालुओं को मां के दिव्य स्वरूप के साथ माता लक्ष्मी, भूमि देवी और भगवान शिव के दर्शन का भी अवसर मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी वजह से उनके दरबार में आयोजित होने वाला यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

आठ प्रकार की धातुओं के सिक्कों से तैयार होता है खजाना

मां अन्नपूर्णा मंदिर में वितरित किया जाने वाला खजाना इस आयोजन को दूसरी धार्मिक परंपराओं से अलग पहचान देता है। मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में अलग-अलग प्रकार के सिक्के और धान का लावा दिया जाता है। इन सिक्कों में आठ प्रकार की धातुओं के सिक्के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रचलित मुद्रा के साथ पुराने और अब चलन से बाहर हो चुके सिक्के भी शामिल रहते हैं।

मंदिर प्रबंधन की ओर से इस वर्ष लगभग 8 से 10 लाख रुपये मूल्य के सिक्कों के वितरण की तैयारी बताई गई है। इसके अलावा खजाने के पूजन में 21 किलोग्राम के रजत खजाने का भी विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालुओं को मिलने वाले इन सिक्कों को भक्त मां का आशीर्वाद मानकर अपने घर लेकर जाते हैं। AajTak +2

यहां मिलने वाले सिक्के केवल आर्थिक मूल्य के आधार पर महत्वपूर्ण नहीं माने जाते, बल्कि उनके साथ श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी होती है। कई परिवार इन सिक्कों को वर्षों तक संभालकर रखते हैं। कुछ लोग इन्हें अपनी तिजोरी, पूजा स्थल या अनाज रखने वाले भंडार में सुरक्षित रखते हैं।

आठ से दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

पांच दिवसीय महोत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 8 से 10 लाख भक्तों के काशी पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। धनतेरस के दिन विशेष रूप से श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है।

काशी की धार्मिक पहचान केवल मंदिरों और घाटों तक सीमित नहीं है। यहां त्योहारों के दौरान सदियों पुरानी परंपराएं भी जीवंत हो उठती हैं। मां अन्नपूर्णा के मंदिर में खजाना वितरण ऐसी ही एक परंपरा है, जिसमें श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचकर शामिल होते हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी भक्तों के आने की उम्मीद है।

भक्तों की संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना मंदिर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। मंदिर तक पहुंचने और दर्शन के बाद बाहर निकलने के लिए निर्धारित मार्गों का पालन करना श्रद्धालुओं के हित में रहेगा।

अन्नकूट महोत्सव में सजेगा 108 व्यंजनों का भोग

इस पांच दिवसीय आयोजन का अंतिम चरण अन्नकूट महोत्सव होगा। 10 नवंबर को मां अन्नपूर्णा को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। मंदिर की जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने और मंदिर परिसर में फल, मेवा, मिठाइयों तथा लड्डुओं की आकर्षक झांकियां सजाने की तैयारी है।

अन्नकूट का धार्मिक महत्व भी काफी व्यापक है। इस दिन भक्त मां अन्नपूर्णा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और अन्न को ईश्वर का प्रसाद मानकर उसकी पूजा करते हैं। मंदिर में तैयार किए जाने वाले विभिन्न पकवान मां को समर्पित किए जाते हैं। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाता है।

अन्नकूट की परंपरा भारतीय संस्कृति में अन्न के सम्मान और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक मानी जाती है। इस अवसर पर मंदिर में सजने वाली भव्य झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनती हैं।

बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा से जुड़ी है मान्यता

मां अन्नपूर्णा की इस परंपरा का संबंध बाबा विश्वनाथ से जुड़ी धार्मिक कथा से भी बताया जाता है। मान्यता है कि काशी में भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा के रूप में अन्न प्राप्त किया था। मां अन्नपूर्णा को संसार का भरण-पोषण करने वाली देवी माना जाता है। इसी धार्मिक विश्वास के आधार पर काशी में अन्नदान और प्रसाद वितरण को विशेष पुण्य का कार्य माना जाता है।

मंदिर के महंत गोस्वामी शंकर पुरी के अनुसार, धनतेरस से अन्नकूट तक चलने वाला यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। खजाने का पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं को सिक्के और लावा प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। AajTak +1

श्रद्धालुओं के लिए क्या है खास?

इस वर्ष के आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए कई विशेष आकर्षण रहने वाले हैं।

* 6 नवंबर को धनतेरस पर विशेष पूजन और खजाना वितरण।

* 6 से 10 नवंबर तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन।

* प्रसाद के रूप में सिक्के और धान का लावा।

* 10 नवंबर को भव्य अन्नकूट महोत्सव।

* मां को 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित करने की तैयारी।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि मंदिर पहुंचने से पहले दर्शन और प्रवेश संबंधी नवीनतम निर्देशों की जानकारी आधिकारिक मंदिर माध्यमों से प्राप्त कर लें।

काशी की दीपावली को खास बनाती है यह परंपरा

काशी में दीपावली केवल दीप जलाने और पूजा करने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सदियों पुरानी परंपराओं का उत्सव भी है। मां अन्नपूर्णा मंदिर में होने वाला खजाना वितरण इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालु सिक्कों और लावा को मां के आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हैं। उनके लिए इनका महत्व बाजार मूल्य से कहीं अधिक है। यही कारण है कि हर साल लाखों लोग इस विशेष अवसर की प्रतीक्षा करते हैं।

धनतेरस से अन्नकूट तक मां अन्नपूर्णा का दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन, विशेष पूजा, सिक्कों का प्रसाद और अन्नकूट की भव्य झांकी इस बार भी काशी की दीपावली को यादगार बनाएगी। मां अन्नपूर्णा के दरबार से मिलने वाला यह प्रतीकात्मक खजाना भक्तों के मन में सुख, समृद्धि और अन्नपूर्णता की कामना को और मजबूत करता है।

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