• होम
  • देश
  • पेट्रोल में 30 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल का दावा, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

पेट्रोल में 30 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल का दावा, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करना है। इसी नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। E20 का...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • November 7, 2026 10:44 am IST, Published 8 hours ago

नयी दिल्लीः दिल्ली की राजनीति में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के मुद्दे को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के सरकारी दावे पर सवाल उठाते हुए इसे ‘E20 नहीं, 420’ करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक एथेनॉल मिलाकर आम जनता की जेब पर बोझ डाला जा रहा है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता और एथेनॉल मिश्रण को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई पेट्रोल सैंपल की जांच का हवाला दिया। उनके मुताबिक, कर्नाटक के सात जिलों से पेट्रोल के कुल 14 नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया। जांच के नतीजों का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि 14 में से 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सरकारी तेल कंपनियों के नमूनों का भी जिक्र किया। उनके दावे के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन यानी IOCL के एक सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन यानी HPCL के नमूने में यह आंकड़ा 30.5 प्रतिशत तक पहुंच गया। यदि ये आंकड़े जांच और आधिकारिक सत्यापन में सही साबित होते हैं, तो पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के निर्धारित मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

कांग्रेस नेता ने तेल कंपनियों की आंतरिक जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कंपनियों की प्रयोगशालाओं ने पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा को लेकर सही जानकारी सामने नहीं रखी और अपनी रिपोर्ट में अधिक मिश्रण का उल्लेख नहीं किया। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को आम उपभोक्ताओं के साथ धोखे के रूप में पेश करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

दरअसल, केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करना है। इसी नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। E20 का सामान्य अर्थ पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण है। हालांकि, इस लक्ष्य के साथ ईंधन की गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

राहुल गांधी के आरोपों ने इस नीति के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर बहस को नया आधार दे दिया है। खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि अलग-अलग जिलों में लिए गए पेट्रोल के नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल पाया गया है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी होगी और संबंधित तेल कंपनियों से क्या जवाब मांगा जाएगा।

हालांकि, इस मामले में राहुल गांधी की ओर से बताए गए जांच के आंकड़ों और तेल कंपनियों की रिपोर्ट पर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर किसी कंपनी या सरकारी एजेंसी की गलती को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर उठा यह विवाद राजनीतिक मुद्दा बनने के साथ-साथ आम वाहन चालकों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय और संबंधित तेल कंपनियों के रुख पर है। सवाल यही है कि क्या कर्नाटक में सामने आए बताए जा रहे आंकड़ों की विस्तृत जांच होगी और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?

 

Advertisement