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अभिषेक बनर्जी का बड़ा आरोप, छह महीने में सातवीं बार हमले की कोशिश

इस घटनाक्रम ने बंगाल में पहले से जारी टीएमसी और बीजेपी के राजनीतिक संघर्ष को और हवा दे दी है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। टीएमसी इस घटना को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा से जोड़कर उठा...

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Gauravshali Bharat News
  • November 7, 2026 11:30 am IST, Published 7 hours ago

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता स्थित उनके आवास के बाहर बीजेपी समर्थकों ने हमला किया। उन्होंने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अभिषेक बनर्जी का दावा है कि लगातार दो दिनों तक उनके घर की रेकी करने के बाद देर रात करीब दो बजे इस घटना को अंजाम दिया गया।
अभिषेक बनर्जी के मुताबिक, यह घटना शनिवार, 7 नवंबर की सुबह करीब दो बजे कालीघाट स्थित उनके आवास के बाहर हुई। उस समय उनके समर्थक और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उनका 39वां जन्मदिन मनाने के लिए वहां एकत्र हुए थे। इसी दौरान कथित तौर पर बीजेपी समर्थकों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प होने की खबर सामने आई। इस दौरान पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही पार्टी के बैनर और पोस्टर को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही जा रही है।

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि दो दिनों तक उनके घर की निगरानी करने के बाद रात करीब दो बजे उनके आवास पर हमला किया गया। उन्होंने लोगों से वीडियो देखने की अपील करते हुए कहा कि फुटेज से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। टीएमसी सांसद ने सवाल उठाया कि यदि एक निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह की घटना हो सकती है, तो पश्चिम बंगाल में आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी।

अभिषेक बनर्जी ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि पिछले छह महीनों में उन पर जानलेवा हमले की कोशिशों की यह सातवीं घटना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में असामाजिक तत्वों के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में न्यायपालिका पर निशाना साधा और मूक दर्शक बने रहने का आरोप लगाया।

टीएमसी सांसद ने कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी घटनास्थल पर मौजूद थे, इसके बावजूद कथित हमले को रोकने में नाकाम रहे। इस आरोप के बाद पुलिस की भूमिका भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जांच तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। इस घटनाक्रम ने बंगाल में पहले से जारी टीएमसी और बीजेपी के राजनीतिक संघर्ष को और हवा दे दी है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। टीएमसी इस घटना को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा से जोड़कर उठा रही है, जबकि बीजेपी की ओर से लगाए गए आरोपों पर उसका आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर आखिरकार विवाद किस वजह से शुरू हुआ और हिंसा के लिए जिम्मेदार कौन था? सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो की जांच, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और पुलिस की कार्रवाई से ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटना के दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं। आने वाले दिनों में टीएमसी इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के सवाल पर उठा सकती है। वहीं, बीजेपी की प्रतिक्रिया और पुलिस की जांच पर भी सभी की नजर रहेगी।

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