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तमिलनाडु में सियासी संग्राम: विजय को शपथ से इनकार पर राज्यपाल घिरे सवालों में

तमिलनाडु की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब टीवीके (TVK) प्रमुख और अभिनेता से नेता बने विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से राज्यपाल ने इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और राज्यपाल की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे […]

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  • May 7, 2026 5:08 pm IST, Published 1 week ago

तमिलनाडु की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब टीवीके (TVK) प्रमुख और अभिनेता से नेता बने विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से राज्यपाल ने इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और राज्यपाल की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि साल 2018 में जब एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी यानी ईपीएस ने बिना स्पष्ट बहुमत के सरकार बनाई थी, तब राजभवन का रवैया अलग नजर आया था। ऐसे में अब विजय के मामले में अलग रुख अपनाने पर विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक सवाल खड़े कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, हालिया विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता के करीब पहुंच बनाई। पार्टी ने कई बड़े दलों को कड़ी टक्कर दी और विजय को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जाने लगा। हालांकि सरकार गठन को लेकर स्थिति तब जटिल हो गई जब राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने का न्योता देने से इनकार कर दिया। राजभवन की ओर से कहा गया कि बहुमत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही आगे निर्णय लिया जाएगा।

राज्यपाल के इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में यह निर्णय लिया गया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा। विजय समर्थकों ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि 2018 में भी तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति थी। उस समय एआईएडीएमके सरकार के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, फिर भी तत्कालीन राज्यपाल ने ईपीएस को सरकार बनाने का अवसर दिया था। इतना ही नहीं, उन्हें बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त समय भी मिला था। अब विजय के मामले में अलग रवैया अपनाना राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

विजय लंबे समय से फिल्मों के जरिए तमिल जनता के बीच लोकप्रिय रहे हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने युवाओं और मध्यम वर्ग को जोड़ने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसी का असर रहा कि पहली बार चुनाव मैदान में उतरी उनकी पार्टी को व्यापक समर्थन मिला।

फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सभी की नजरें अब राजभवन और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है। वहीं विजय समर्थकों को उम्मीद है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिलेगा।

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