पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को एक नया इतिहास रच दिया गया। भाजपा विधायक रतिंद्र बोस को 18वीं विधानसभा का अध्यक्ष निर्विरोध चुन लिया गया। खास बात यह रही कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर बंगाल के किसी नेता को विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी मिली है। उनके निर्वाचन के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल देखा गया। विपक्ष की भूमिका में बैठी तृणमूल कांग्रेस ने इस पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। इसके चलते रतिंद्र बोस की जीत पहले से लगभग तय मानी जा रही थी। सदन में मौजूद भाजपा विधायकों ने ध्वनि मत से उनका समर्थन किया और उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई। विधानसभा में मौजूद सभी 207 भाजपा विधायकों ने मेज थपथपाकर नए स्पीकर का स्वागत किया।
रतिंद्र बोस लंबे समय से उत्तर बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। संगठन और सदन दोनों में उनकी शांत लेकिन प्रभावशाली कार्यशैली की चर्चा होती रही है। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें अनुभवी और संतुलित चेहरा मानते हुए इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तर बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। स्पीकर चुने जाने के बाद रतिंद्र बोस ने कहा कि वे सदन को निष्पक्ष तरीके से चलाने की कोशिश करेंगे और सभी दलों को बराबर सम्मान मिलेगा। उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की बात भी कही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला केवल एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं बल्कि भाजपा का बड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। उत्तर बंगाल से आने वाले नेता को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि रतिंद्र बोस सदन की कार्यवाही को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।