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दूसरे शहर में नौकरी या पढ़ाई करने वालों की जनगणना कहां होगी? जानिए सरकार का नियम

नई दिल्ली : देशभर में चल रही जनगणना के बीच लोगों के मन में एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने गांव या गृह राज्य को छोड़कर नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के लिए दूसरे शहर में रह रहा है, तो उसकी गिनती आखिर कहां की जाएगी। इसको लेकर सरकार और […]

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  • May 24, 2026 11:14 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : देशभर में चल रही जनगणना के बीच लोगों के मन में एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने गांव या गृह राज्य को छोड़कर नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के लिए दूसरे शहर में रह रहा है, तो उसकी गिनती आखिर कहां की जाएगी। इसको लेकर सरकार और जनगणना विभाग ने साफ किया है कि किसी भी व्यक्ति की गणना उसके “सामान्य निवास स्थान” यानी जहां वह वर्तमान में रह रहा है, वहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश की वास्तविक आबादी, रोजगार, शिक्षा, आवास और संसाधनों की स्थिति का सटीक आंकड़ा जुटाना होता है। इसलिए यह जरूरी है कि किसी व्यक्ति की गिनती केवल एक ही स्थान पर हो। इसी वजह से जो लोग दूसरे शहरों में रहकर नौकरी कर रहे हैं, पढ़ाई कर रहे हैं या किराए के मकानों में रह रहे हैं, उनकी जानकारी उसी शहर में दर्ज की जाएगी जहां वे सामान्य रूप से निवास कर रहे हैं।

जनगणना अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई छात्र दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु या किसी अन्य शहर में पढ़ाई कर रहा है और लंबे समय से वहीं रह रहा है, तो उसकी गिनती उसके कॉलेज या किराए के निवास वाले शहर में होगी। इसी तरह फैक्ट्रियों, कंपनियों या निर्माण कार्यों में लगे प्रवासी मजदूरों को भी उसी क्षेत्र की जनसंख्या में शामिल किया जाएगा जहां वे वर्तमान में काम कर रहे हैं।

सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक जनगणना के दौरान यह देखा जाता है कि व्यक्ति पिछले कुछ समय से कहां रह रहा है और आने वाले महीनों में उसका निवास कहां रहने की संभावना है। इसी आधार पर उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज न हो।

विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत जैसे विशाल देश में बड़ी संख्या में लोग रोजगार और शिक्षा के लिए पलायन करते हैं। अगर ऐसे लोगों की गिनती केवल उनके पैतृक गांव या स्थायी पते पर की जाए, तो शहरों की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा। इससे सरकारी योजनाओं, परिवहन, पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल और आवास जैसी सुविधाओं की योजना प्रभावित हो सकती है।

जनगणना विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किराए के मकानों में रहने वाले लोगों की जानकारी स्थानीय स्तर पर दर्ज की जाएगी। चाहे व्यक्ति अकेले रह रहा हो, परिवार के साथ रह रहा हो या हॉस्टल में रह रहा हो, उसकी गणना उसी पते पर की जाएगी जहां वह वास्तव में निवास कर रहा है।

हालांकि कुछ मामलों में अस्थायी यात्राओं को अलग माना जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति कुछ दिनों के लिए किसी दूसरे शहर में घूमने, रिश्तेदारी या अल्पकालिक काम से गया है, तो उसकी गिनती उसके स्थायी निवास वाले स्थान पर ही की जाएगी। लेकिन लंबे समय तक रहने वाले लोगों को उसी शहर की आबादी में शामिल किया जाएगा।

जनगणना अधिकारियों के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती प्रवासी आबादी की सही पहचान करना है। बड़े शहरों में लाखों लोग किराए के कमरों, पीजी, हॉस्टल और अस्थायी बस्तियों में रहते हैं। कई बार लोग पूरी जानकारी देने से बचते हैं या पहचान संबंधी दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं करा पाते। इसके बावजूद कर्मचारियों को घर-घर जाकर वास्तविक जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही जनगणना आंकड़े देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस शहर या क्षेत्र में कितनी आबादी रह रही है और वहां किस स्तर की सुविधाओं की जरूरत है। खासकर तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में प्रवासी आबादी का सही रिकॉर्ड विकास योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है।

जनगणना विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सही जानकारी दें और कर्मचारियों का सहयोग करें, ताकि देश की जनसंख्या का सटीक डेटा तैयार किया जा सके और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।

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