नयी दिल्ली: ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच पूरी होना बेहद जरूरी है। अदालत ने मीडिया ट्रायल और समय से पहले की जा रही बयानबाजी पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि मामले को इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे न्यायपालिका जांच में दखल दे रही हो, जबकि अदालत ने अब तक कोई राय व्यक्त नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा कि ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार हो चुका है, इसलिए अब सबसे जरूरी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने मीडिया से भी अपील की कि परिवार के भावनात्मक बयानों के आधार पर मामले को तय न किया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे मीडिया में बयानबाजी करने से बचें। अदालत ने कहा कि संभावित गवाह, आरोपी या संबंधित लोग सार्वजनिक मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के सामने अपनी बात रखें।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में अटकलों और मीडिया ट्रायल से जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना उचित होगा और सभी पक्षों को जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीआई इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही एजेंसी केस दर्ज कर सकती है। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और उम्मीद जताई कि केंद्रीय जांच एजेंसी जल्द कार्रवाई करेगी।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की मंजूरी और संबंधित नोटिफिकेशन मिलने के बाद सीबीआई आधिकारिक रूप से केस दर्ज कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि कुछ रिपोर्ट्स और चर्चाओं में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। अदालत ने कहा कि उसने मामले में कोई पूर्व राय नहीं बनाई है और न ही किसी पक्ष का समर्थन किया है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत का उद्देश्य सिर्फ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों का मनोबल गिराना भी उचित नहीं है।
ट्विशा शर्मा के परिवार ने मानसिक प्रताड़ना, दहेज मांग और मामले को दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बहस को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए विशेष बेंच गठित की।
रजिस्ट्री से रिपोर्ट मंगाने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई शुरू की। अब सभी की नजर संभावित सीबीआई जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया, मीडिया की भूमिका और निष्पक्ष जांच जैसे बड़े सवाल भी इसके केंद्र में आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के अपना काम करने दिया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में सीबीआई की एंट्री और जांच की दिशा इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।