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अट्टापडी मधु लिंचिंग केस: केरल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 12 दोषियों की सजा बढ़ाकर की उम्रकैद

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी— ‘यह भीड़ हिंसा का ऐसा खौफनाक रूप था, जहां एक बेबस आदिवासी युवक का शिकार कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया’ कोच्चि/पलक्कड़ : केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने सोमवार को साल 2018 के बहुचर्चित और दिल दहला देने वाले ‘अट्टापडी मधु लिंचिंग मामले’ में एक ऐतिहासिक और […]

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  • May 25, 2026 8:27 pm IST, Published 30 minutes ago

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी— ‘यह भीड़ हिंसा का ऐसा खौफनाक रूप था, जहां एक बेबस आदिवासी युवक का शिकार कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया’

कोच्चि/पलक्कड़ : केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने सोमवार को साल 2018 के बहुचर्चित और दिल दहला देने वाले ‘अट्टापडी मधु लिंचिंग मामले’ में एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए इस मामले के 12 दोषियों की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद (Life Imprisonment) में तब्दील कर दिया है। अदालत ने इस घटना को समाज पर एक कलंक और मानवता के खिलाफ क्रूर अपराध करार दिया है।

यह आदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस ए राजा विजयराघवन और जस्टिस के वी जयकुमार शामिल थे, ने जारी किया।

📝 कोर्ट का आदेश: दोषियों पर लगीं गंभीर धाराएं

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि आरोपी समाज में किसी भी तरह की ढील के हकदार नहीं हैं।

  • इन धाराओं में पाए गए दोषी: कोर्ट ने पाया कि आरोपी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 पार्ट-II (गैर-इरादतन हत्या), SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) और IPC की धारा 149 (गैर-कानूनी जनसमूह) के तहत गंभीर रूप से दोषी हैं।

  • सजा में बदलाव: इस मामले में कुल 16 आरोपी थे। हाईकोर्ट ने पहले आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है, जबकि 16वें आरोपी की सजा में कुछ तकनीकी बदलाव किए हैं। वहीं, मुख्य 12 दोषियों की 7 साल की सजा को बढ़ाकर अब सीधे उम्रकैद कर दिया गया है।

क्या था पूरा मामला? (सिर्फ चावल चोरी के आरोप में ली जान)

यह दर्दनाक घटना फरवरी 2018 की है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

  1. चोरी का झूठा आरोप: केरल के पलक्कड़ जिले के अट्टापडी इलाके के रहने वाले 27 वर्षीय आदिवासी युवक मधु पर एक स्थानीय दुकान से चावल और कुछ किराने का सामान चोरी करने का आरोप लगाया गया था।

  2. भीड़ का अमानवीय चेहरा: इस मामूली बात पर इलाके की उग्र भीड़ ने मानसिक रूप से कमजोर मधु को जंगल से ढूंढ निकाला, उसे बंधक बनाया और सार्वजनिक रूप से बुरी तरह अपमानित किया।

  3. पीट-पीटकर हत्या: भीड़ ने मधु को तब तक बर्बरता से पीटा, जब तक कि उसकी जान नहीं चली गई।

  4. वायरल वीडियो से फैला था आक्रोश: चौंकाने वाली बात यह थी कि जब मधु को पीटा जा रहा था, तब कुछ लोग उसके साथ सेल्फी ले रहे थे और वीडियो बना रहे थे। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे केरल सहित देश भर में भारी जनाक्रोश फैल गया था, जिसके बाद सरकार को विशेष जांच टीम (SIT) का गठन करना पड़ा था।

निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर

  • अप्रैल 2023 (मन्नारक्कड़ स्पेशल कोर्ट): विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए 16 में से 14 आरोपियों को दोषी ठहराया था। तब अदालत ने 13 आरोपियों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।

  • मई 2026 (केरल हाईकोर्ट): पीड़ितों और राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे ‘दुर्लभ और क्रूरतम’ भीड़ हिंसा (Mob Lynching) माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह किसी सामान्य झगड़े का मामला नहीं था, बल्कि एक असहाय आदिवासी युवक को घेरकर उसका ‘शिकार’ किया गया था। इसी आधार पर कोर्ट ने दोषियों की सजा को 7 साल से बढ़ाकर सीधे उम्रकैद में बदल दिया।

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