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‘विधान-चेतना’ तथा 89 खंडों में प्रकाशित संसदीय अभिलेखों का होगा विमोचन

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दिनांक 28 मई 2026, गुरुवार को दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान-चेतना’ के प्रथम अंक तथा केंद्रीय विधान सभा (1924–1930) की कार्यवाहियों के 89 खंडों में प्रकाशित ऐतिहासिक संकलन का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित […]

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  • May 26, 2026 5:48 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दिनांक 28 मई 2026, गुरुवार को दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान-चेतना’ के प्रथम अंक तथा केंद्रीय विधान सभा (1924–1930) की कार्यवाहियों के 89 खंडों में प्रकाशित ऐतिहासिक संकलन का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम भारत की समृद्ध संसदीय विरासत और समकालीन विधायी विकास के मध्य एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगा। यह समारोह दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन संस्थागत इतिहास के संरक्षण एवं आधुनिक लोकतांत्रिक विमर्श को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस गरिमामयी समारोह में अनेक विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय स्तर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। भारत सरकार के माननीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त, दिल्ली सरकार के माननीय विधायी कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, दिल्ली विधानसभा के माननीय उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायकगण, दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक प्रोफेसर, इतिहास विषय के शिक्षक, प्रख्यात विद्वान एवं इतिहासकार भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

यह संयुक्त लोकार्पण शोधकर्ताओं, विधायकों एवं नागरिकों के लिए अत्यंत ऐतिहासिक एवं बौद्धिक महत्व रखता है। केंद्रीय विधान सभा (1924–1930) की कार्यवाहियों के 89 खंड स्वतंत्रता-पूर्व भारत के शासन एवं संसदीय विमर्श के एक परिवर्तनकारी कालखंड का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं। इन अभिलेखों में तत्कालीन भारतीय जनप्रतिनिधियों के विचार-विमर्श, बहसों एवं संवैधानिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण संकलन सुरक्षित किया गया है।

इसके साथ ही, ‘विधान-चेतना’ का शुभारंभ एक ऐसे बौद्धिक मंच के रूप में किया जा रहा है, जो समकालीन विधायी विषयों, संवैधानिक शासन व्यवस्था तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विश्लेषण एवं विमर्श को समर्पित होगा।

‘विधान-चेतना’ तथा केंद्रीय विधान सभा की ऐतिहासिक कार्यवाहियों के इस संयुक्त लोकार्पण के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक एवं संसदीय विरासत को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित होगा। ऐतिहासिक शोध एवं समकालीन विधायी चिंतन को एक साथ प्रस्तुत करते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने लोकतांत्रिक संवाद, संस्थागत स्मृति एवं संसदीय परंपराओं के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया है।

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