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NEET री-टेस्ट के लिए सेना-वायुसेना की एंट्री, पेपर लीक के बाद सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम; पीएम मोदी भी रख रहे नजर

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने री-टेस्ट को लेकर अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट के लिए प्रश्नपत्रों के परिवहन में भारतीय सेना और वायुसेना की मदद ली जाएगी। गुरुवार […]

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  • May 29, 2026 9:50 am IST, Published 10 hours ago

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने री-टेस्ट को लेकर अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट के लिए प्रश्नपत्रों के परिवहन में भारतीय सेना और वायुसेना की मदद ली जाएगी। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उनकी छपाई, पैकेजिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था के तहत संचालित की जाएगी। सरकार का मानना है कि पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए सुरक्षा और पारदर्शिता के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बैठक के बाद बताया कि पिछली परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों के परिवहन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से डाक विभाग और गृह मंत्रालय के पास होती थी, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना को भी जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्रों को अत्याधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

फीस रिफंड की समय सीमा बढ़ी

एनटीए ने री-टेस्ट में शामिल होने वाले छात्रों को राहत देते हुए फीस रिफंड के लिए बैंक खाते की जानकारी जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। पहले यह समयसीमा 27 मई निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 22 जून की रात तक कर दिया गया है। एजेंसी का कहना है कि कई छात्रों और अभिभावकों ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

री-टेस्ट की तैयारियों पर पीएम मोदी की सीधी नजर

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं NEET री-टेस्ट की तैयारियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परीक्षा से जुड़े हर महत्वपूर्ण फैसले और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी नियमित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय को दी जा रही है। केंद्र सरकार इस परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और विवादमुक्त बनाने के लिए कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर रक्षा तंत्र को भी परीक्षा प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

परीक्षा प्रबंधन कंपनी पर भी उठे सवाल

इस बीच परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी निजी कंपनी को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीबीएसई द्वारा जिस कंपनी को ओएसएम से जुड़ा ठेका दिया गया था, वह पहले ‘ग्लोबरेना’ नाम से जानी जाती थी। इस कंपनी का नाम तेलंगाना में वर्ष 2019 और 2023 में सामने आए बोर्ड परीक्षा विवादों में भी आया था। उन घटनाओं के बाद कई छात्रों की आत्महत्या की खबरों ने देशभर में चिंता पैदा कर दी थी। हालांकि संबंधित मामलों की जांच पहले ही हो चुकी है, लेकिन NEET विवाद के बाद कंपनी की भूमिका पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

राहुल गांधी ने छात्र के परिवार से मुलाकात की

NEET पेपर लीक विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में उस छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की, जिसने कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ियों और प्रश्न बैंक लीक की खबरों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। राहुल गांधी ने परिवार से मुलाकात के बाद केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रदीप की मौत केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और विफल परीक्षा व्यवस्था का परिणाम है। राहुल ने कहा कि जब युवाओं के सपनों से खिलवाड़ होता है और जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बचते हैं, तब ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस मामले में जवाबदेह ठहराया।

CBI की जांच तेज, 13 गिरफ्तारियां

उधर, पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) लगातार कार्रवाई कर रही है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस हर्षद कुमार शाह को 1 जून तक सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। वहीं प्रह्लाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 10 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

सीबीआई अब तक देशभर के 49 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन सबूतों के आधार पर पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

23 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला

गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के कुछ दिनों बाद प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। 7 मई को एनटीए को गड़बड़ी की सूचना मिली, जिसके बाद जांच शुरू हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-टेस्ट कराने का निर्णय लिया गया।

अब 21 जून को होने वाला री-टेस्ट केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। सरकार, एनटीए और जांच एजेंसियां दावा कर रही हैं कि इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जिनसे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। लाखों छात्र और अभिभावक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार उन्हें निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रक्रिया देखने को मिलेगी।

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