नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI ) द्वारा पहलवान विनेश फोगाट के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े बाद के घटनाक्रमों को देखते हुए याचिका अब प्रभावहीन हो चुकी है और इस पर आगे विचार करने की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वह हाई कोर्ट की टिप्पणियों और निष्कर्षों को दोहराने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
इस मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि हाई कोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने की प्रक्रिया पर कुछ सवाल उठते हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने की थी।
दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने मई में विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी। अदालत का मानना था कि चयन नीति में ऐसे खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जो विशेष परिस्थितियों के बाद खेल में वापसी कर रहे हों। हाई कोर्ट ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी का भी निर्देश दिया था।
हालांकि, ट्रायल में विनेश फोगाट को निराशा हाथ लगी। महिला 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में युवा पहलवान मीनाक्षी गोयत ने उन्हें 6-4 से हराया। इस हार के साथ एशियाई खेल 2026 के लिए उनकी दावेदारी समाप्त हो गई।
चूंकि चयन ट्रायल संपन्न हो चुके हैं और विनेश प्रतियोगिता में भाग लेकर हार चुकी हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि डब्ल्यूएफआई की याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।