मुंबई : भारत के कंपाउंड लाइवस्टॉक फ़ीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) ने सोयाबीन मील (एसबीएम) की बढ़ती कमी पर चिंता व्यक्त की है। सोयाबीन मील पशु आहार में उपयोग होने वाला एक महत्वपूर्ण प्रोटीन घटक है, जिसकी कमी के कारण फ़ीड की लागत में तेज़ वृद्धि हो रही है और देश के पोल्ट्री, एक्वाकल्चर तथा पशुपालन क्षेत्रों के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं।
हाल के सप्ताहों में सोयाबीन मील की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और यह लगभग ₹65-66 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जिससे पशु आहार उत्पादन की लागत बढ़ी है और संपूर्ण पशु प्रोटीन मूल्य श्रृंखला से जुड़े किसानों पर असर पड़ रहा है।
सोयाबीन मील संतुलित एवं पोषणयुक्त पशु आहार का एक अनिवार्य घटक है, जो उत्पादकता, पशुओं के स्वास्थ्य और किसानों की आय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान आपूर्ति संकट और बढ़ती कीमतें फ़ीड निर्माताओं और किसानों दोनों पर भारी दबाव डाल रही हैं, जिससे भारत की पशु प्रोटीन मूल्य श्रृंखला की प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता प्रभावित होने का खतरा है।
यह चिंता विशेष रूप से एक्वाकल्चर क्षेत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, जहां कुल उत्पादन लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत हिस्सा फ़ीड पर खर्च होता है। भारत वैश्विक समुद्री खाद्य आपूर्ति में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है, ऐसे में किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले फ़ीड अवयवों की उपलब्धता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
इस विषय पर टिप्पणी करते हुए, दिव्या कुमार गुलाटी, चेयरपर्सन, सीएलएफएमए ऑफ इंडिया (CLFMA of India) ने कहा:
“भारत के पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पशुपालन क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और निर्यात के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। सोयाबीन मील की लगातार कमी और बढ़ती फ़ीड लागत पूरी मूल्य श्रृंखला में उत्पादकता और लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है। भारत यदि वैश्विक समुद्री खाद्य निर्यात में अग्रणी बनने का लक्ष्य रखता है, तो उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती फ़ीड अवयवों की उपलब्धता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना होगा। सीएलएफएमए सभी हितधारकों से मिलकर ऐसे संतुलित और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कार्य करने का आग्रह करता है, जो किसानों के हितों की रक्षा करते हुए देश के फ़ीड और पशु कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाए।”
यह मुद्दा भारत सरकार के समुद्री खाद्य निर्यात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के दृष्टिकोण के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हाल ही में पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत अगले पांच वर्षों में समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाकर 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की क्षमता रखता है, जो वर्तमान स्तर का लगभग 2.5 गुना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत और लचीले फ़ीड तंत्र की आवश्यकता होगी, जो उत्पादकता, गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को निरंतर समर्थन प्रदान कर सके।
फ़ीड निर्माताओं और संबद्ध हितधारकों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष उद्योग संस्था के रूप में सीएलएफएमए ऑफ इंडिया का मानना है कि सोयाबीन मील की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और देश की खाद्य एवं एक्वाकल्चर अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों को समर्थन देने के लिए समयबद्ध और सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक हैं।
उभरती चुनौती से निपटने के लिए सीएलएफएमए की प्रमुख सिफारिशें:
घरेलू फ़ीड निर्माण के लिए सोयाबीन मील की संतुलित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, साथ ही सोयाबीन उत्पादकों के हितों की भी रक्षा की जाए।
आपूर्ति दक्षता बढ़ाने के लिए सोयाबीन प्रसंस्करण और मूल्य श्रृंखला अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित किया जाए।
नीति निर्माताओं, किसान संगठनों, प्रसंस्करण इकाइयों और फ़ीड निर्माताओं के बीच सहयोग को मजबूत कर दीर्घकालिक प्रोटीन सुरक्षा रोडमैप तैयार किया जाए।
फ़ीड की वहनीयता और क्षेत्रीय विकास को समर्थन देने वाला स्थिर एवं पूर्वानुमानित नीतिगत वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
सोयाबीन मील की उपलब्धता और मूल्य अस्थिरता की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किए जाएं, ताकि आपूर्ति में व्यवधान को रोका जा सके।
सीएलएफएमए का मानना है कि आज फ़ीड सुरक्षा सुनिश्चित करना ही भविष्य में भारत के पशुधन उत्पादन, एक्वाकल्चर विकास, निर्यात विस्तार और पोषण सुरक्षा संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने की आधारशिला साबित होगा।
सीएलएफएमए ऑफ इंडिया (CLFMA of India) के बारे में
CLFMA of India भारत के पशुधन क्षेत्र का शीर्ष उद्योग संगठन है। वर्ष 1967 में स्थापित यह संस्था पशु प्रोटीन मूल्य श्रृंखला से जुड़े विभिन्न हितधारकों—फ़ीड निर्माता, पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर, पशु पोषण एवं स्वास्थ्य कंपनियां, पशु चिकित्सा सेवाएं, पशुधन उपकरण प्रदाता, प्रोसेसर, निर्यातक और अन्य संबद्ध उद्योगों—को एक साझा मंच प्रदान करती है। देशभर में 250 से अधिक सदस्यों के साथ सीएलएफएमए को केंद्र एवं राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत द्वारा पशुधन क्षेत्र की एक प्रमुख आवाज़ के रूप में मान्यता प्राप्त है।