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बिहार में शादी-ब्याह में भी नहीं बजेंगे जातिसूचक गाने

पटना: बिहार सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गीतों के प्रसारण पर रोक को लेकर एक बार फिर सख्ती दिखाई है। सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि शादी-विवाह, सामाजिक समारोह, जुलूस और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में ऐसे गीतों का प्रसारण नहीं किया जाएगा, जो किसी जाति विशेष […]

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  • June 17, 2026 4:19 pm IST, Published 3 hours ago

पटना: बिहार सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गीतों के प्रसारण पर रोक को लेकर एक बार फिर सख्ती दिखाई है। सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि शादी-विवाह, सामाजिक समारोह, जुलूस और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में ऐसे गीतों का प्रसारण नहीं किया जाएगा, जो किसी जाति विशेष के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करते हों या सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हों।

प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक समरसता बनाए रखना और सार्वजनिक आयोजनों को मर्यादित एवं सकारात्मक वातावरण में आयोजित करना है।

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राज्य सरकार पहले भी अश्लील और जातिसूचक गीतों के खिलाफ अभियान चला चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे गीत कई बार सामाजिक तनाव और विवाद की वजह बनते हैं। इसी को देखते हुए सभी जिलों में प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

सामाजिक संगठनों और कई नागरिकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि सार्वजनिक आयोजनों में ऐसे गीतों पर रोक से बेहतर सामाजिक माहौल बनाने में मदद मिलेगी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि जागरूकता अभियान के जरिए भी लोगों को इस संबंध में शिक्षित किया जाना चाहिए। सरकार ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में जिम्मेदारी का परिचय दें और ऐसे गीतों के प्रसारण से बचें, जिससे किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग की भावनाएं आहत हों।

 

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