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तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा: कोविड-19 की उत्पत्ति पर फिर उठा सवाल, डॉ. फाउची पर लगाए गंभीर आरोप

वॉशिंगटन। कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर वर्षों से चल रही वैश्विक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि कोविड-19 वायरस से जुड़े अनुसंधानों के लिए अमेरिकी धन का उपयोग चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला तक […]

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  • June 19, 2026 10:49 pm IST, Published 3 hours ago

वॉशिंगटन। कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर वर्षों से चल रही वैश्विक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि कोविड-19 वायरस से जुड़े अनुसंधानों के लिए अमेरिकी धन का उपयोग चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला तक पहुंचा था। उन्होंने आरोप लगाया कि महामारी की शुरुआत और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर अमेरिकी जनता तथा दुनिया के सामने पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई।

तुलसी गबार्ड ने कहा कि उनके कार्यालय द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में ऐसे संकेत मिलते हैं जिनसे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति प्रयोगशाला से जुड़े किसी शोध कार्य से हुई हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका के पूर्व शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एंथनी फाउची की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने वुहान लैब में किए जा रहे कुछ अनुसंधानों को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई थी।

गबार्ड का दावा है कि महामारी के दौरान और उसके बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक होने से रोका गया। उनका कहना है कि अमेरिकी नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि कोविड-19 जैसी विनाशकारी महामारी की वास्तविक उत्पत्ति क्या थी और इसके लिए कौन-कौन से निर्णय जिम्मेदार रहे। उन्होंने यह भी कहा कि महामारी से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में मतभेद बने हुए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक ऐसा कोई निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि कोविड-19 वायरस किसी प्रयोगशाला से ही निकला था। दूसरी ओर, कुछ अमेरिकी एजेंसियों और जांच रिपोर्टों ने लैब-लीक सिद्धांत को संभावित संभावना के रूप में स्वीकार किया है। यही कारण है कि वायरस की वास्तविक उत्पत्ति का प्रश्न अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं माना जाता।

डॉ. एंथनी फाउची और उनके समर्थकों ने पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना रहा है कि महामारी के दौरान लिए गए फैसले उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों और सार्वजनिक स्वास्थ्य हितों को ध्यान में रखकर किए गए थे। फाउची लगातार यह कहते रहे हैं कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर निष्कर्ष वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया था। लाखों लोगों की मौत हुई, वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई और कई देशों में लंबे समय तक लॉकडाउन लागू करना पड़ा। ऐसे में महामारी की उत्पत्ति से जुड़ा हर नया दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और जांच का विषय बन जाता है।

तुलसी गबार्ड के हालिया दावों के बाद अमेरिका में राजनीतिक और वैज्ञानिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यदि और दस्तावेज या जांच रिपोर्टें सामने आती हैं, तो कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर चल रही बहस को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल यह मुद्दा एक बार फिर वैश्विक राजनीति, विज्ञान और सार्वजनिक नीति के केंद्र में आ गया है।

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