नयी दिल्ली: भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार के समक्ष मामला रखने की सलाह दी है।
याचिका में एनकाउंटर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने तथा एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध भी किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि घटना की परिस्थितियों को देखते हुए पूरे मामले की गहन पड़ताल आवश्यक है।
उधर, बिहार सरकार पहले ही इस घटना की न्यायिक जांच कराने का निर्णय ले चुकी है। सरकार का कहना है कि जांच के माध्यम से घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समीक्षा की जाएगी।
मामले के बीच बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। यह कदम घटना से जुड़े कुछ वीडियो और प्रारंभिक तथ्यों के सामने आने के बाद उठाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई आत्मरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तहत की गई थी।
घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, जबकि मृतक के परिजन और समर्थक घटना पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। अब न्यायिक जांच और अदालत में चल रही प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।