रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने राज्य के सभी सरकारी शिक्षकों के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ‘जे-गुरुजी’ (J-Guruji) मोबाइल ऐप पर अपनी कक्षाओं का वार्षिक और मासिक पाठ्यक्रम (Syllabus) अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है।
राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने 24 जून को इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी करते हुए राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO), जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
आदेश के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी 80 स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (School of Excellence) और 325 प्रखंड स्तरीय आवासीय विद्यालयों में इस नई डिजिटल व्यवस्था का शत-प्रतिशत और कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षण कार्य की नियमित डिजिटल निगरानी, सिलेबस की समयबद्ध प्रगति और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।
इस नई व्यवस्था के तहत सिर्फ सिलेबस अपलोड करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि इसके सत्यापन की भी त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई है:
शिक्षकों की जिम्मेदारी: प्रत्येक शिक्षक को अपनी विषयवार और कक्षावार स्प्लिट सिलेबस (Split Syllabus) की कवरेज रिपोर्ट ‘जे-गुरुजी’ ऐप पर नियमित रूप से अपडेट करनी होगी।
प्रधानाध्यापक का अप्रूवल: शिक्षकों द्वारा अपलोड किए गए पाठ्यक्रम की समीक्षा विद्यालय के प्रधानाध्यापक (Headmaster/Principal) करेंगे। विद्यालय प्रमुख द्वारा ऐप के माध्यम से ‘अनुमोदन’ (Approval) दिए जाने के बाद ही संबंधित पाठ्यक्रम को प्रभावी और मान्य माना जाएगा।
अधिकारियों की निगरानी: जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को अपने अधीनस्थ आने वाले सभी स्कूलों में इस प्रक्रिया की रैंडम जांच करने और इसका शत-प्रतिशत अनुपालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने स्पष्ट किया है कि ‘जे-गुरुजी’ ऐप के इस इंटीग्रेशन से अब रांची स्थित मुख्यालय से ही राज्य स्तर पर सिलेबस मॉनिटरिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे अधिकारियों को एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि किस स्कूल में, किस कक्षा का, कितना सिलेबस पूरा हो चुका है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई की नियमित समीक्षा करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।