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पुणे कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा

पुणे : महाराष्ट्र के पुणे में चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस ने कई ऐसे तथ्य सामने रखे हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और अधिक सनसनीखेज बना दिया है। शुरुआती तौर पर इसे एक हादसा बताने की कोशिश की गई थी, लेकिन गहन जांच के बाद पुलिस ने दावा किया […]

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  • June 28, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

पुणे : महाराष्ट्र के पुणे में चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस ने कई ऐसे तथ्य सामने रखे हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और अधिक सनसनीखेज बना दिया है। शुरुआती तौर पर इसे एक हादसा बताने की कोशिश की गई थी, लेकिन गहन जांच के बाद पुलिस ने दावा किया है कि यह पूरी तरह से पूर्व नियोजित हत्या थी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने हत्या की योजना कई सप्ताह पहले तैयार की थी और उसे दुर्घटना का रूप देने के लिए इंटरनेट पर विभिन्न तरीकों की जानकारी भी जुटाई थी।

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी रिया गोयल और उसके करीबी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल की हत्या को अंजाम देने से पहले ऑनलाइन कई तरह की जानकारी खोजी। जांच एजेंसियों को आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड से ऐसे संकेत मिले हैं कि उन्होंने इंटरनेट पर यह पता लगाने का प्रयास किया था कि किसी व्यक्ति की मौत को दुर्घटना जैसा कैसे दिखाया जा सकता है। इसके अलावा कथित तौर पर जहर देने और अन्य तरीकों से हत्या करने से जुड़ी जानकारियां भी तलाश की गई थीं।

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपियों ने पुणे के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले का कई बार दौरा किया था। पुलिस का कहना है कि इन दौरों का उद्देश्य केवल घूमना नहीं था, बल्कि ऐसी जगह की पहचान करना था जहां किसी व्यक्ति को धक्का देने पर घटना पहली नजर में दुर्घटना प्रतीत हो। पुलिस को संदेह है कि इसी योजना के तहत घटना स्थल का चयन किया गया।

पुलिस के मुताबिक 18 जून की सुबह करीब 10:30 बजे रिया गोयल अपने होने वाले पति केतन अग्रवाल के साथ लोहागढ़ किले पहुंची। कुछ देर बाद चेतन चौधरी भी वहां पहुंच गया। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर केतन को गहरी खाई की ओर धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद आरोपियों ने पूरे मामले को दुर्घटना साबित करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, रिया गोयल ने यह कहानी बनाई कि फोटो खिंचवाते समय केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट भी साझा की, ताकि लोगों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था। हालांकि पुलिस जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने इस कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।

जांच अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आरोपियों की गतिविधियां, मोबाइल फोन की लोकेशन, डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी। पुलिस ने आरोपियों के ऑनलाइन सर्च रिकॉर्ड, आपसी बातचीत और घटनास्थल से जुड़े अन्य सबूतों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या के पीछे व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ा विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि रिया गोयल और चेतन चौधरी एक-दूसरे के काफी करीब थे। बताया जा रहा है कि दोनों की पहली मुलाकात पिछले वर्ष अक्टूबर में एक दिवाली पार्टी के दौरान हुई थी, जिसके बाद उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों के रिश्ते के कारण केतन अग्रवाल उनके लिए बाधा बन गए थे।

पुलिस का दावा है कि इसी वजह से केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई। हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां डिजिटल फॉरेंसिक, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी गहन जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

यह मामला महाराष्ट्र के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जाएगी। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किस तरह गंभीर अपराधों की योजना बनाने में किया जा सकता है।

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