महाराष्ट्र के पुणे जिले में दिल दहला देने वाली घटना के महज 60 दिन के भीतर अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। पुणे की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के दोषी 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है।
रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस: विशेष न्यायाधीश ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) की श्रेणी में माना। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी की करतूत बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर थी।
60 दिन में न्याय: घटना के बाद से महज 60 दिनों के रिकॉर्ड समय में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर फैसला सुनाया गया है। जस्टिस सालुंखे ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था।
कड़ी सुरक्षा: सोमवार सुबह 11 बजे भारी पुलिस सुरक्षा के बीच आरोपी भीमराव कांबले को अदालत में पेश किया गया, जहाँ उसे फांसी की सजा सुनाई गई।
पेशा और परिवार: दोषी भीमराव कांबले पेशे से एक मजदूर है। वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों का दादा है।
पुराना रिकॉर्ड: कांबले का आपराधिक इतिहास पहले भी बेहद संदिग्ध रहा है। उस पर पहले भी एक महिला और 17 साल की किशोरी के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप हैं।
घटना का दिन: यह वीभत्स घटना 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी।
नानी के घर आई थी बच्ची: पीड़िता गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर रहने आई हुई थी।
लालच देकर ले गया: दोपहर 3 से 4 बजे के बीच आरोपी कांबले बच्ची को खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।
दरिंदगी और हत्या: आरोपी बच्ची को मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहाँ उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने व बर्बरता की हदें पार करते हुए पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।