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बुंदेलखंड से गंगा एक्सप्रेसवे तक… अखिलेश ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है और इसका असर जनता के सामने आ रहा […]

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  • July 2, 2026 6:38 pm IST, Published 3 hours ago

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है और इसका असर जनता के सामने आ रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, तो उसके कुछ ही समय बाद सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। उन्होंने इसे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

सपा प्रमुख ने गंगा एक्सप्रेसवे का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां भी निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बड़े उद्घाटन और प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली परियोजनाएं लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रहें।

अखिलेश यादव ने कहा कि एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रदेश के विकास की पहचान होती हैं। इसलिए इन परियोजनाओं में पारदर्शिता, उच्च गुणवत्ता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि किसी भी परियोजना में निर्माण संबंधी खामियां सामने आती हैं, तो उनकी स्वतंत्र जांच कराई जाए और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

हालांकि, सरकार और संबंधित एजेंसियां समय-समय पर यह कहती रही हैं कि जहां भी निर्माण संबंधी तकनीकी खामियां सामने आती हैं, उन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में तुरंत ठीक कराया जाता है और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। राज्य में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को लेकर शुरू हुई यह बयानबाजी एक बार फिर विकास कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही को राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आई है।

 

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