नई दिल्ली: भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अप्रैल 2026 में देश के कुल कोयला आयात में लगभग 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की रणनीति अब जमीन पर असर दिखाने लगी है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में जहां देश ने 24.27 मिलियन टन कोयले का आयात किया था, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर 21.13 मिलियन टन रह गया। यानी एक वर्ष में करीब 3.14 मिलियन टन कम कोयला विदेशों से मंगाया गया।
सबसे अधिक कमी बिजली क्षेत्र में देखने को मिली। तापीय बिजली संयंत्रों ने आयातित कोयले पर अपनी निर्भरता काफी हद तक घटाई है। घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता के कारण बिजली उत्पादन के लिए आयात लगभग 25 प्रतिशत कम हो गया। आयातित कोयले पर पूरी तरह आधारित बिजली संयंत्रों के आयात में भी 27 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि घरेलू बिजली संयंत्रों द्वारा मिश्रण के लिए आयात किए जाने वाले कोयले में भी उल्लेखनीय कमी आई।
सरकारी प्रयासों का असर देश की कुल ऊर्जा खपत में भी दिखाई दे रहा है। कुल कोयला खपत में आयातित कोयले की हिस्सेदारी अप्रैल 2025 के 21.69 प्रतिशत से घटकर अप्रैल 2026 में 19.68 प्रतिशत रह गई। यह दर्शाता है कि घरेलू उत्पादन लगातार आयात का विकल्प बनता जा रहा है।
हालांकि, इस्पात उद्योग की आवश्यकताओं को देखते हुए कोकिंग कोयले के आयात में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के सीमित भंडार होने के कारण इस श्रेणी में आयात फिलहाल आवश्यक बना हुआ है। इसलिए इस वृद्धि को आयात पर बढ़ती निर्भरता के बजाय औद्योगिक जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उत्पादन बढ़ाने, खदानों से तेज आपूर्ति सुनिश्चित करने, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने, रेल परिवहन में सुधार और तापीय बिजली संयंत्रों के कोयला भंडार की नियमित निगरानी जैसे कदमों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। कोल इंडिया लिमिटेड और अन्य एजेंसियों के समन्वय से देशभर के बिजली संयंत्रों तक समय पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर अपनी निर्भरता और कम कर सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई गति मिलेगी।