कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में तेज गर्मी और छिटपुट हिंसा के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। दोपहर 1 बजे तक राज्य में कुल मतदान प्रतिशत 60 फीसदी के पार पहुंच गया, जो इस चरण के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। वहीं तमिलनाडु में इसी समय तक मतदान का प्रतिशत थोड़ा कम रहा।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दोपहर एक बजे तक लगभग 62.18% मतदान दर्ज किया गया, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा करीब 56.81% रहा। इससे स्पष्ट है कि बंगाल में मतदाताओं ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया है। पश्चिम मेदिनीपुर में करीब 65.77% और झारग्राम में 65.31% मतदान हुआ। इसके अलावा बांकुरा (64.58%), बीरभूम (63.93%) और दक्षिण दिनाजपुर (63.05%) में भी मतदान का प्रतिशत काफी ऊंचा रहा। मुर्शिदाबाद में 62.71% और पूर्वी मेदिनीपुर में 62.90% मतदान दर्ज किया गया।
वहीं कुछ जिलों में मतदान का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा, जिसमें मालदा (58.45%), पुरुलिया (59.83%), दार्जिलिंग (59.81%) और कैलिम्पोंग (59.52%) शामिल हैं। हालांकि अधिकांश जिलों में मतदान 60 फीसदी के आसपास या उससे अधिक रहा, जो इस बात का संकेत है कि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए लगभग 3.60 करोड़ मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सभी 152 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) 148 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है।
पहले चरण का चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बहुल क्षेत्रों को शामिल किया गया है। ये वे इलाके हैं जहां राजनीतिक मुकाबला काफी कड़ा माना जाता है और पिछले चुनावों में भी इन क्षेत्रों की भूमिका निर्णायक रही है।
हालांकि कुछ जगहों से हिंसा और तनाव की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान उत्साह और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रहा है, जो लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।