नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पूंजी बाजार में नियामकीय अनुपालन को सख्ती से लागू करते हुए 11 शोध विश्लेषकों (रिसर्च एनालिस्ट) और संस्थाओं का पंजीकरण रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई अनिवार्य नवीनीकरण शुल्क निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा नहीं करने के कारण की गई। सेबी ने स्पष्ट किया कि यह कदम निवेशकों के हितों की रक्षा और समाप्त हो चुके पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सेबी के आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई SEBI (Research Analysts) Regulations के तहत की गई है। जिन व्यक्तियों और संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनमें 24 कैरेट फाइनेंशियल सर्विसेज, बंसल फिनस्टॉक प्राइवेट लिमिटेड, सागर शाह, मनोज अशोक कुमार, अमर कुमार श्रीवास्तव, यश उत्तमानी, लक्ष्मीश्री इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड समेत कुल 11 इकाइयां शामिल हैं।
नियामक ने अपने आदेश में कहा कि पंजीकरण रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति या संस्थाएं अपनी पूर्व गतिविधियों से जुड़े दायित्वों से मुक्त हो जाएंगी। यदि उनके कार्यकाल के दौरान किसी तरह की अनियमितता, चूक या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे उसके लिए कानूनी रूप से जवाबदेह रहेंगे।
सेबी ने बताया कि इस कार्रवाई से पहले संबंधित इकाइयों को फरवरी 2025 तथा मई-जून 2026 के दौरान कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस में उनसे पूछा गया था कि निर्धारित शुल्क जमा न करने और नियमों का पालन न करने के बावजूद उनका पंजीकरण क्यों न रद्द किया जाए।
हालांकि, तय समय सीमा के भीतर किसी भी संबंधित व्यक्ति या संस्था की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।सेबी का यह कदम निवेशकों का भरोसा बनाए रखने और पूंजी बाजार में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा।