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भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, हाईकोर्ट में सुनवाई जारी

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उनकी विधानसभा चुनाव जीत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाटन विधानसभा सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य […]

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  • August 7, 2026 7:00 pm IST, Published 56 minutes ago

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उनकी विधानसभा चुनाव जीत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाटन विधानसभा सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना था। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में आगे जारी रहेगी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। अदालत ने संकेत दिया कि यह देखना आवश्यक होगा कि कथित आचार संहिता उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर वास्तविक और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा या नहीं। ऐसे प्रश्नों का अंतिम निर्धारण साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।

यह विवाद वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। भाजपा उम्मीदवार विजय बघेल ने चुनाव याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि मतदान से पहले लागू 48 घंटे के ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान भूपेश बघेल ने रोड शो किया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन है। उनका कहना है कि इस कथित उल्लंघन का चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ा, इसलिए चुनाव परिणाम की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि याचिका में लगाए गए आरोपों को यदि सही भी मान लिया जाए, तब भी वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत “भ्रष्ट आचरण” की श्रेणी में नहीं आते। उन्होंने तर्क दिया कि यह अधिकतम चुनावी अपराध से संबंधित मामला हो सकता है, लेकिन इससे चुनाव परिणाम स्वतः प्रभावित नहीं माना जा सकता।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि भूपेश बघेल ने पाटन सीट पर लगभग 20 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में कथित घटनाक्रम और चुनाव परिणाम के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करना आवश्यक होगा। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से अपील पर नोटिस जारी करने और राहत देने की मांग की गई थी।

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि याचिकाकर्ता अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक तर्क हाईकोर्ट के समक्ष रख सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल को चुनाव याचिका की सुनवाई योग्यता को हाईकोर्ट में चुनौती देने की अनुमति दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल किया, लेकिन जून 2026 में हाईकोर्ट ने उसे खारिज करते हुए चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना। उसी आदेश के खिलाफ उन्होंने दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव याचिका पर सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जारी रहेगी। वहां दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और कानूनी तर्क प्रस्तुत करेंगे।  चुनाव याचिकाओं में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि यह भी साबित करना पड़ता है कि कथित अनियमितता का परिणाम पर महत्वपूर्ण असर पड़ा। ऐसे मामलों में साक्ष्य, गवाहों और चुनावी रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम निर्णय दिया जाता है।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला फिर से हाईकोर्ट की सुनवाई पर केंद्रित हो गया है।

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