दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा देशवासियों से किए गए ‘राष्ट्र प्रथम’ आह्वान का समर्थन करते हुए ईंधन बचत, ग्रीन मोबिलिटी और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले को सीमित करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) एवं सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री आज डॉ. बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय के 14वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए भी न्यूनतम सुरक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन के जरिए पहुंची। उनका यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि वीआईपी संस्कृति से आगे बढ़कर जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वह अपने काफिले में अधिकतर चार वाहनों को रखेंगी। उन्होंने न केवल अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम की, बल्कि मंत्रियों और अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे विभागीय कार्यों के लिए मेट्रो, बसों या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दें। उन्होंने सभी मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और नागरिकों से भी सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि नागरिकों के छोटे-छोटे जिम्मेदार प्रयासों से होता है। अगर प्रत्येक व्यक्ति ईंधन, बिजली और संसाधनों की थोड़ी-थोड़ी बचत करेगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर दिखाई देगा।
विपक्ष पर सीएम का प्रहार, कहा: यह ‘विफलता’ नहीं, ‘दूरदर्शिता’ है
विपक्ष द्वारा नेताओं के काफिलों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने कहा था कि सरकार पहले खुद पर नियम लागू करे। हमने आज वही किया है। लेकिन अब क्या विपक्ष के नेता अपना ‘लग्जरी मोह’ छोड़कर सड़कों पर उतरने का साहस दिखाएंगे? विपक्ष का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने उजागर हो चुका है। विपक्षी नेताओं के ‘विफलता के सबूत’ वाले बयानों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी जैसे दूरदर्शी नेता आने वाले संकट के प्रति जनता को जागरूक करते है, जबकि अवसरवादी विपक्ष डर का माहौल बनाते है। पेट्रोल बचाना और स्वदेशी संसाधनों का उपयोग करना ‘राष्ट्रनीति’ है, न कि राजनीति। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति केवल विरोध तक सीमित है, लेकिन राष्ट्र निर्माण के लिए त्याग की आवश्यकता होती है। हमने वीआईपी कल्चर को पीछे छोड़कर ‘ग्रीन मोबिलिटी’ को चुना है, जो आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।