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मुंबई मोहर्रम जुलूस में कथित जहरीले कैप्सूल बांटने का मामला, पुलिस जांच तेज

मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मोहर्रम के दौरान निकले जुलूस से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि जुलूस में शामिल लोगों के बीच कथित तौर पर चूहे मारने की दवा से जुड़े कैप्सूल बांटे गए। इस मामले में पुणे निवासी 39 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार […]

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  • June 28, 2026 7:30 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मोहर्रम के दौरान निकले जुलूस से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि जुलूस में शामिल लोगों के बीच कथित तौर पर चूहे मारने की दवा से जुड़े कैप्सूल बांटे गए। इस मामले में पुणे निवासी 39 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से बड़ी संख्या में करीब 1400 कैप्सूल बरामद किए गए हैं। घटना के बाद पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और बरामद कैप्सूलों को रासायनिक परीक्षण के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है।

पुलिस के मुताबिक यह घटना मुंबई के बायकुला इलाके में मोहर्रम जुलूस के दौरान सामने आई। आरोप है कि आरोपी श्रद्धालुओं के बीच कैप्सूल वितरित कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों को उस पर संदेह हुआ और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक युवक ने इन कैप्सूलों का सेवन भी कर लिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने पर तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार बरामद कैप्सूलों में जिंक फॉस्फाइड होने की आशंका जताई गई है। जिंक फॉस्फाइड का उपयोग सामान्य तौर पर चूहों को मारने की दवा के रूप में किया जाता है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत खतरनाक माना जाता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण का इंतजार किया जा रहा है।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि उसने ये कैप्सूल ऑनलाइन खरीदे थे। उसका कहना है कि मोहर्रम के दौरान मातम और आत्म-यातना जैसी धार्मिक परंपराओं में हिस्सा लेने वाले लोगों को दर्द से राहत दिलाने के उद्देश्य से वह इन्हें बांट रहा था। हालांकि पुलिस को आरोपी का यह स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं लगा। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दवा या रासायनिक पदार्थ का सार्वजनिक वितरण बिना चिकित्सकीय अनुमति और उचित जानकारी के गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

मामले की जांच कर रही टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इतनी बड़ी मात्रा में कैप्सूल कहां से खरीदे, क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है या उसने यह काम अकेले किया। पुलिस ऑनलाइन खरीद के रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। साथ ही आरोपी के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम का पता लगाया जा सके।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की पढ़ाई की है। जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि वह पहले इराक और ईरान की यात्रा कर चुका है। फिलहाल पुलिस यह स्पष्ट कर रही है कि विदेश यात्रा का इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इस पहलू की भी जांच केवल तथ्यों के आधार पर की जा रही है और किसी भी प्रकार का निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जाएगा।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन, धार्मिक जुलूस या भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम में अनजान व्यक्ति द्वारा दी गई दवा, खाद्य सामग्री या किसी भी प्रकार का पदार्थ बिना जांच के ग्रहण न करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। इससे संभावित दुर्घटनाओं और अपराधों को समय रहते रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि बरामद कैप्सूलों में वास्तव में जहरीला पदार्थ पाया जाता है तो आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में कोई अलग तथ्य सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। जांच पूरी होने तक प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।

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