बालाघाट (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। वारासिवनी थाना क्षेत्र के नांदगांव पंचायत में एक व्यक्ति ने अपनी अविवाहित बेटी से जन्मे नवजात शिशु को कथित तौर पर गोबर के ढेर में जिंदा दफना दिया। घटना के बाद आरोपी नाना ने भी कीटनाशक पी लिया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जानकारी 31 जुलाई को मिली थी, लेकिन लगातार बारिश और अंधेरा होने के कारण गोबर के ढेर से नवजात का शव अगले दिन निकाला जा सका। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
ग्रामीणों के मुताबिक, घटना वाली रात उन्हें नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी थी। जब पड़ोसियों ने परिवार से इस बारे में पूछा तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इससे ग्रामीणों को शक हुआ।
इसके बाद गांव के सरपंच ने बैठक बुलाई, जहां आशा कार्यकर्ता ने बताया कि परिवार की अविवाहित बेटी कुछ समय से गर्भवती थी। संदेह गहराने पर सरपंच ने पुलिस को सूचना दी।
नायब तहसीलदार, डॉक्टरों और पुलिस की मौजूदगी में गोबर के ढेर की खुदाई कराई गई। वहां से नवजात बालक का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, बच्चे के मुंह और गले में कपड़ा बंधा हुआ मिला, जिससे प्रारंभिक आशंका है कि दफनाने से पहले उसकी सांस रोकने की कोशिश की गई हो। हालांकि, मौत के सही कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
घटना के बाद आरोपी नाना धारासिंह मड़ावी ने कथित तौर पर कीटनाशक पी लिया। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
वारासिवनी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
यह घटना सामाजिक दबाव, पारिवारिक परिस्थितियों और नवजात की सुरक्षा जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। मामले की विस्तृत जांच के बाद ही सभी तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे।