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आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों की अनियमितताओं पर शिकंजा

महिला आयोग ने बनाई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति नई दिल्ली: देशभर के आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों और एआरटी (ART) केंद्रों में बढ़ती अनियमितताओं और अनैतिक प्रथाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने इन संस्थानों को विनियमित करने वाले कानूनों और रूपरेखा की व्यापक समीक्षा के लिए […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 10, 2026 5:07 am IST, Published 45 minutes ago

महिला आयोग ने बनाई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति

नई दिल्ली: देशभर के आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों और एआरटी (ART) केंद्रों में बढ़ती अनियमितताओं और अनैतिक प्रथाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने इन संस्थानों को विनियमित करने वाले कानूनों और रूपरेखा की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के प्रजनन अधिकारों, सुरक्षा और उनकी गरिमा की पुख्ता रक्षा करना है।

न्यायमूर्ति आशा मेनन करेंगी समिति की अध्यक्षता

महिला आयोग द्वारा गठित इस बहु-विषयक (multidisciplinary) उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन करेंगी। इस समिति में न्यायपालिका, चिकित्सा विज्ञान, फोरेंसिक साइंस, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, स्त्री रोग (गाइनेकोलॉजी), पब्लिक पॉलिसी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

कानूनों के क्रियान्वयन और कमियों पर रहेगी नजर

यह विशेष समिति प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिन्दुओं पर गहराई से काम करेगी:

  • कानूनों की समीक्षा: असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) रेगुलेशन एक्ट 2021, सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 और वर्ष 2026 में अधिसूचित प्रासंगिक संशोधन नियमों के क्रियान्वयन की जमीनी जांच करना।

  • दोषों की पहचान: मरीजों की गोपनीयता, सहमति (consent), और जैविक ट्रैसेबिलिटी (biological traceability) से जुड़े मौजूदा सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर विधिक व प्रक्रियागत कमियों को उजागर करना।

  • एसओपी (SOP) का निर्माण: क्लीनिकों में पारदर्शिता बढ़ाने, एकसमान क्लिनिकल प्रोटोकॉल तय करने और नैतिक उपचार को बढ़ावा देने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करना।

अनियमितताओं और वित्तीय शोषण पर कसेगा शिकंजा

महिला आयोग ने रेखांकित किया है कि फर्टिलिटी सेक्टर में मेडिकल टूरिज्म के विस्तार के कारण लिंग चयन और कानूनी सुरक्षा उपायों के उल्लंघन जैसी आशंकाएं बढ़ी हैं। इसके अलावा, राज्यों में उपचार के लिए एकसमान प्रोटोकॉल का अभाव और मरीजों का बढ़ता वित्तीय शोषण भी चिंता का विषय रहा है।

आयोग को पूरा विश्वास है कि इस उच्चस्तरीय समिति की ठोस सिफारिशें भविष्य में प्रशासनिक, नीतिगत और कानूनी सुधारों का मार्ग प्रशस्त करेंगी, जिससे फर्टिलिटी सेक्टर में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

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