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दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई महंगी, कार्यकारी परिषद ने फीस वृद्धि को मंजूरी

नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए संशोधित फीस संरचना को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत कई पाठ्यक्रमों की फीस में अधिकतम 10 प्रतिशत तक […]

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  • July 31, 2026 11:48 am IST, Published 44 minutes ago

नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए संशोधित फीस संरचना को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत कई पाठ्यक्रमों की फीस में अधिकतम 10 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। यह बदलाव आगामी सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ संबंधित पाठ्यक्रमों में लागू नियमों के अनुसार प्रभावी होगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि समय के साथ बढ़ती प्रशासनिक लागत, शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार, तकनीकी सुविधाओं के विकास और बुनियादी ढांचे के रखरखाव को ध्यान में रखते हुए फीस संरचना की समीक्षा की गई है। परिषद की स्वीकृति के बाद नई फीस व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

संशोधित फीस संरचना के दायरे में विश्वविद्यालय के अनेक प्रमुख पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें सभी स्नातकोत्तर (पीजी) कार्यक्रम, कला संकाय के पाठ्यक्रम, क्लस्टर इनोवेशन सेंटर के स्नातक कार्यक्रम, पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम, बीटेक, इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी), पीजी डिप्लोमा, एडवांस्ड डिप्लोमा, प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा पीएचडी कार्यक्रम शामिल हैं। इससे बड़ी संख्या में वर्तमान और नए छात्रों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

विश्वविद्यालयों में समय-समय पर फीस की समीक्षा एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह भी जरूरी है कि फीस वृद्धि छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न बने। खासतौर पर ऐसे विद्यार्थी, जो सीमित आय वाले परिवारों से आते हैं, उनके लिए उच्च शिक्षा का खर्च पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में छात्रवृत्ति, फीस सहायता और आर्थिक सहयोग योजनाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

वहीं, छात्र संगठनों ने फीस बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा सभी वर्गों की पहुंच में रहनी चाहिए। यदि फीस में लगातार बढ़ोतरी होती रही तो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करना कठिन हो सकता है। कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करने और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए विशेष राहत देने की मांग की है।

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शोध गतिविधियों और नई तकनीकों के समावेश के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। यदि फीस वृद्धि का उपयोग इन सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार में किया जाता है, तो इससे छात्रों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय देशभर के लाखों विद्यार्थियों की पहली पसंद माना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र यहां स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं। ऐसे में फीस से जुड़ा कोई भी बदलाव व्यापक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों को वित्तीय संतुलन और छात्रों की वहन क्षमता के बीच संतुलित नीति अपनानी चाहिए।

फिलहाल नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया के साथ संशोधित फीस संरचना लागू होने की तैयारी है। छात्रों और अभिभावकों को प्रवेश से पहले संबंधित पाठ्यक्रम की अद्यतन फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार अवश्य जांच लेनी चाहिए। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि फीस वृद्धि का असर प्रवेश रुझानों और छात्र नामांकन पर किस हद तक पड़ता है।

 

 

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