नयी दिल्ली: पश्चिम बंगाल में करीब पंद्रह दिन के लंबे राजनीतिक दौरे के दौरान 50 से अधिक रैलियां और रोड शो करने के बाद गृहमंत्री अमित शाह अब अपने अगले बड़े राजनीतिक लक्ष्य की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली लौटते ही उन्होंने पार्टी संगठन के साथ मिलकर पंजाब पर केंद्रित एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अब उनका पूरा ध्यान आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर है, जो अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी ने अब पंजाब को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। जबकि पार्टी को यूपी, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश,और गुजरात जैसे राज्यों में मजबूत स्थिति हासिल है, वहीं पंजाब में अभी भी राजनीतिक चुनौती बरकरार है। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व, खासकर अमित शाह, ने राज्य में संगठन विस्तार और जनसंपर्क को नई दिशा देने का निर्णय लिया है।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का “मिशन पंजाब” मई महीने से औपचारिक रूप से शुरू होगा। इस योजना के तहत वे हर महीने राज्य का दौरा करेंगे और वहां पार्टी के कार्यक्रमों, जनसभाओं और संगठनात्मक बैठकों में भाग लेंगे। बीजेपी इस बार पंजाब में जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक मुद्दों से जुड़ा होगा, जिसमें नशे के खिलाफ जागरूकता को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, और इसे लेकर व्यापक जन आंदोलन की जरूरत है।
भाजपा ने पंजाब में नशे के खिलाफ एक विशेष यात्रा और जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना तैयार की है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, यह अभियान केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एक बड़ा संदेश देगा। इस मुहिम के जरिए युवाओं को नशे से दूर करने और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश की जाएगी।
वहीं अमित शाह पहले भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहे हैं, साल 2016 में जब पंजाब में अकाली-बीजेपी गठबंधन की सरकार थी, तब भी उन्होंने नशे के खिलाफ एक यात्रा शुरू करने की योजना बनाई थी, हालांकि उस समय कुछ परिस्थितियों के चलते इसे स्थगित करना पड़ा था। अब एक बार फिर इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर बीजेपी राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है।
2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने नशे के मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाया था और उसे चुनावी सफलता में एक महत्वपूर्ण कारण माना गया। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार बनने के बाद इस दिशा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। बीजेपी इसी मुद्दे को लेकर मौजूदा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है।
अमित शाह की यह लगातार सक्रियता इस बात का संकेत है कि बीजेपी पंजाब को लेकर अपनी रणनीति को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रही है। हर महीने होने वाले दौरे, संगठन को मजबूत करने की कवायद और सामाजिक मुद्दों पर फोकस…इन सबके जरिए पार्टी राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश करेगी आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह “मिशन पंजाब” राज्य की राजनीति में कितना असर डाल पाता है और क्या बीजेपी अपनी स्थिति को मजबूत करने में सफल हो पाती है या नहीं।