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राम-कृष्ण का जिक्र, सपा निशाने पर… यूपी 2027 की रणनीति साफ़

हरदोई: हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों का शुरुआती स्वर भी तय कर दिया। गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन मंच से पीएम मोदी ने विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए […]

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  • April 29, 2026 2:04 pm IST, Published 1 hour ago

हरदोई: हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों का शुरुआती स्वर भी तय कर दिया। गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन मंच से पीएम मोदी ने विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ते हुए भगवान राम और भगवान कृष्ण का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह भूमि आस्था और परंपरा की रही है, लेकिन पिछली सरकारों के दौरान राज्य की छवि अपराध और अराजकता से जुड़ गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है और अब यूपी को एक बेहतर प्रशासनिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री का यह भाषण सिर्फ अतीत और वर्तमान की तुलना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भविष्य की राजनीतिक दिशा भी स्पष्ट दिखाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को राज्य की प्रगति रास नहीं आ रही और वह जातीय विभाजन की राजनीति के जरिए पुराने दौर को वापस लाना चाहती है। इसी संदर्भ में उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए विपक्ष पर महिला विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया। पीएम मोदी के अनुसार, यह विधेयक महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने का माध्यम बन सकता था, लेकिन विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया।

उन्होंने संसद के हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए यह भी कहा कि कुछ दल ऐसे मुद्दों पर एकजुट हो जाते हैं, जहां राज्य के हितों की अनदेखी होती है। इस दौरान उन्होंने दक्षिण भारत की पार्टी डीएमके का उदाहरण देते हुए संकेत दिया कि विपक्षी दल उत्तर प्रदेश के राजनीतिक महत्व को कम करने की कोशिश करते हैं, और समाजवादी पार्टी भी उनके साथ खड़ी नजर आती है। इस पूरे राजनीतिक विमर्श के बीच विकास परियोजनाओं का उल्लेख भी रणनीतिक रूप से किया गया। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल जैसी परियोजनाओं को भविष्य के उत्तर प्रदेश की तस्वीर के रूप में पेश किया गया। यह संदेश साफ था कि बुनियादी ढांचे का विस्तार ही राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार बनेगा।

कुल मिलाकर, हरदोई का यह मंच एक राजनीतिक संकेतक के रूप में उभरा, जहां विकास और वैचारिक मुद्दों को मिलाकर 2027 के चुनाव के लिए जमीन तैयार की गई। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले चुनाव में मुकाबला सिर्फ नीतियों का नहीं, बल्कि नैरेटिव का भी होगा—जहां एक ओर विकास और स्थिरता का दावा होगा, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर पुराने मॉडल की राजनीति में लौटने का आरोप लगाया जाएगा।

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