नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता और मृत लोगों की पहचान के लिए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू कर दिया। टीम नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए DNA सैंपल की जांच करेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, नेपाल में भारत के राजदूत ने फोरेंसिक टीम से मुलाकात कर उन्हें जरूरी जानकारी दी। इसके बाद भारतीय टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के विशेषज्ञों के साथ तकनीकी चर्चा की।
बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण कई लोगों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में DNA जांच के जरिए शवों की पहचान करने और उनके परिवारों तक जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी। भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल की स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल में राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है। टीम चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइटों पर नेपाली सेना के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चला रही है।
खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक ढांचे के अंदर प्रवेश करने में सफल रही। तलाशी अभियान के दौरान टीम ने वहां से एक व्यक्ति का शव बाहर निकाला।
इलाके में अभी भी खोज और बचाव अभियान जारी है। खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं, लेकिन भारतीय और नेपाली टीमें मिलकर अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत की ओर से राहत, बचाव और पहचान प्रक्रिया में सहयोग जारी है। फोरेंसिक विशेषज्ञों की तैनाती और विशेष टनल रेस्क्यू टीम का अभियान दोनों देशों के बीच आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में सहयोग को दर्शाता है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने तक खोज और बचाव अभियान जारी रहेगा।