नयी दिल्ली: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के लिए एक नया मसौदा जारी किया है। इसमें ई85 (85% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) और ई100 (लगभग शुद्ध एथेनॉल) जैसे वैकल्पिक ईंधनों को आधिकारिक रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाकर देश की आयातित तेल पर निर्भरता को कम करना है। सरकार पहले ही ई20 (20% एथेनॉल मिश्रण) को लागू कर चुकी है, और यह प्रस्ताव उसी नीति को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
मसौदे में बायोडीजल के उपयोग को भी विस्तार देने की योजना है, जिसमें बी10 से बी100 तक के मिश्रण को मान्यता देने का सुझाव शामिल है। साथ ही हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण को भी ईंधन विकल्प के रूप में जोड़ने की बात कही गई है। 27 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, इन प्रस्तावों पर 30 दिनों के भीतर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं।
इन बदलावों से फ्लेक्स-फ्यूल और बायोफ्यूल आधारित वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। ये नियम दोपहिया, तिपहिया, कार और भारी वाहनों सहित सभी श्रेणियों पर लागू होंगे। इसके अलावा, हल्के व्यावसायिक वाहनों को भी शामिल करने के लिए अधिकतम वजन सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ईंधन के मिश्रण के अनुसार खुद को समायोजित कर लेते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता बेहतर होती है।