तमिलनाडु : तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। अभिनेता से नेता बने TVK प्रमुख थलापति विजय को अब राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियों DMK, VCK और CPI का समर्थन मिल गया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की सत्ता और सरकार गठन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों के इस समर्थन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल राज्यपाल की भूमिका को लेकर खड़ा हो गया है।
दरअसल, हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी तेज कर दी है। हालांकि, विपक्षी दलों का साथ मिलने के बावजूद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यपाल आरएन रवि अब किस तरह का फैसला लेते हैं, इस पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है।
विजय के समर्थन में सबसे मुखर आवाज अभिनेता-राजनेता कमल हासन की रही। उन्होंने कहा कि यदि बहुमत का समर्थन मिलने के बाद भी विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाता है, तो यह जनादेश का अपमान माना जाएगा। कमल हासन ने केंद्र सरकार और राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि DMK, VCK और CPI का विजय के पक्ष में आना केवल सत्ता समीकरण नहीं, बल्कि राज्यपाल के फैसलों के खिलाफ एक संयुक्त राजनीतिक रणनीति भी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि बहुमत का दावा करने वाले नेता को मौका नहीं दिया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए गलत संदेश होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य की जनता भी उत्सुकता से राजनीतिक घटनाओं पर नजर बनाए हुए है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक केवल इसी मुद्दे की चर्चा हो रही है। विजय की पार्टी TVK के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इस समर्थन को राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का न्योता देते हैं, तो राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी। वहीं, अगर ऐसा नहीं होता है तो विपक्ष आंदोलन का रास्ता भी अपना सकता है।
फिलहाल, तमिलनाडु की राजनीति में उठे इस नए तूफान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर राज्यपाल के अगले कदम और राजनीतिक दलों की आगामी रणनीति पर टिकी हुई है।