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केरल में मुस्लिम महिला ने हिंदू व्यक्ति का पूरे रीति-रिवाज से किया अंतिम संस्कार

कासरगोड : (केरल)। केरल के कासरगोड जिले से इंसानियत, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। यहां एक मुस्लिम महिला पंचायत प्रतिनिधि ने एक हिंदू व्यक्ति का पूरी धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर समाज के सामने मानवता का […]

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  • June 28, 2026 4:30 pm IST, Published 1 hour ago

कासरगोड : (केरल)। केरल के कासरगोड जिले से इंसानियत, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। यहां एक मुस्लिम महिला पंचायत प्रतिनिधि ने एक हिंदू व्यक्ति का पूरी धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर समाज के सामने मानवता का संदेश प्रस्तुत किया। महिला के इस कदम की सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक हर जगह सराहना हो रही है।

जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 64 वर्षीय नारायणन मंजेश्वरम के रूप में हुई है। वह कासरगोड जिले के चिगरपदवु क्षेत्र के रहने वाले थे और लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीते लगभग एक महीने से उनका इलाज कोडिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

एक महीने पहले बेहद खराब हालत में मिले थे नारायणन

कासरगोड पंचायत की विकास मामलों की स्थायी समिति की अध्यक्ष इरफाना इकबाल ने बताया कि करीब एक माह पहले नारायणन एक दुकान के बरामदे में बेहद कमजोर और भूखे-प्यासे हालत में मिले थे। उनकी शारीरिक स्थिति काफी खराब थी और वह स्वयं अपना ध्यान रखने में भी असमर्थ थे।

मामले की जानकारी मिलने के बाद इरफाना इकबाल ने स्थानीय स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उनकी स्थिति को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई ताकि समय पर उचित चिकित्सा मिल सके।

प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने भी निभाई जिम्मेदारी

इरफाना इकबाल के अनुसार, शुरुआत में नारायणन को ट्रस्ट द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन डॉक्टरों की जांच में पता चला कि उन्हें चौथे चरण का कैंसर है। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल कोडिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज शुरू हुआ।

हालांकि डॉक्टरों के सभी प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी और उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

परिजनों ने शव लेने से किया इनकार

नारायणन के निधन के बाद पुलिस और प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क किया। परिजनों को अस्पताल और पुलिस की ओर से सूचना दी गई, लेकिन बताया गया कि उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया।

ऐसी स्थिति में अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई। इसके बाद परिजनों ने इरफाना इकबाल को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाने की अनुमति दे दी।

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कराया अंतिम संस्कार

इरफाना इकबाल ने किसी भी धार्मिक भावना को आहत किए बिना यह सुनिश्चित किया कि नारायणन का अंतिम संस्कार पूरी तरह हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार ही हो। उन्होंने स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की सहायता से श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं।

उन्होंने स्वयं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की निगरानी की और परंपराओं का पूरा सम्मान करते हुए सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं। इस दौरान उन्होंने बुर्का पहनकर पूरे समय व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। अंतिम संस्कार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह घटना तेजी से वायरल हो गई।

धर्म से ऊपर इंसानियत का संदेश

इरफाना इकबाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की अंतिम विदाई सम्मानपूर्वक होना सबसे बड़ी मानवीय जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि इंसान की पहचान उसके धर्म से पहले उसकी मानवता होती है और किसी भी जरूरतमंद की सहायता करना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार पूरी तरह हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार कराया गया ताकि दिवंगत व्यक्ति की आस्था और धार्मिक मान्यताओं का पूरा सम्मान किया जा सके।

सोशल मीडिया पर मिल रही व्यापक सराहना

घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इरफाना इकबाल के इस मानवीय कदम की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे धार्मिक सौहार्द और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल बताया है। लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में इस प्रकार की घटनाएं समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम करती हैं और यह बताती हैं कि मानवता किसी भी धर्म या जाति से बड़ी होती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों लोगों ने इस घटना को साझा करते हुए इरफाना इकबाल की संवेदनशीलता और सेवा भावना की सराहना की है। कई सामाजिक संगठनों ने भी उनके कार्य को प्रेरणादायक बताया है।

समाज के लिए बनी प्रेरणा

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने का काम करते हैं। कठिन परिस्थितियों में किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और उसकी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए अंतिम संस्कार कराना भारतीय संस्कृति की उस भावना को दर्शाता है, जिसमें सेवा, करुणा और मानवता सर्वोपरि मानी जाती है।

केरल के कासरगोड की यह घटना केवल एक अंतिम संस्कार की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जब इंसानियत सबसे ऊपर रखी जाती है तो धर्म, जाति और समुदाय की सीमाएं स्वतः छोटी पड़ जाती हैं। यही कारण है कि यह घटना आज पूरे देश में सामाजिक सौहार्द और मानवता की प्रेरक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

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