350 से अधिक PNB ग्राहकों के खातों से रकम गायब, CBI जांच शुरू

ग्रेटर नोएडा: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में खाताधारकों की जमा रकम में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक के 350 से अधिक ग्राहकों ने अपने खातों में जमा रकम गायब होने या उसमें अनियमितता की […]

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  • October 30, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

ग्रेटर नोएडा: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में खाताधारकों की जमा रकम में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक के 350 से अधिक ग्राहकों ने अपने खातों में जमा रकम गायब होने या उसमें अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई है। मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि पुलिस को भी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

इस घटनाक्रम ने उन खाताधारकों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बैंक में जमा कराई थी। ग्राहकों का आरोप है कि खाते की जांच करने पर उन्हें जमा राशि में गड़बड़ी का पता चला। शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ने से आशंका जताई जा रही है कि मामले का दायरा शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक हो सकता है।

ग्राहकों की शिकायतों से बढ़ा मामले का दायरा

शुरुआती शिकायतों के बाद बैंक में पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे दिन तक 350 से अधिक खाताधारकों ने अपने खातों में कथित गड़बड़ी की शिकायत की थी। कई ग्राहकों ने बचत खाते के साथ-साथ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी अनियमितता होने की बात कही है।

ग्राहकों का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना खातों से पैसे ट्रांसफर किए गए और कुछ मामलों में मैच्योरिटी से पहले एफडी बंद कर दी गई। कई खाताधारकों ने यह भी दावा किया कि उन्हें संबंधित लेनदेन के बारे में मोबाइल पर कोई एसएमएस अलर्ट या सूचना नहीं मिली। उन्हें रकम कम होने की जानकारी तब हुई, जब वे बैंक पहुंचे या अपने खाते का बैलेंस चेक किया।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ खातों में जमीन अधिग्रहण के बदले मिली मुआवजे की रकम जमा थी। ऐसे परिवारों के लिए यह पैसा भविष्य की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, शादी और अन्य महत्वपूर्ण खर्चों का आधार था।

20 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का आरोप

पुलिस को प्राप्त शिकायतों के आधार पर कथित वित्तीय अनियमितता की रकम 20 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। वहीं, मामले की व्यापकता को देखते हुए यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुल प्रभावित राशि 200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि, 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी आशंका के तौर पर सामने आया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इससे पहले शुरुआती शिकायतों में करीब 35 करोड़ रुपये की रकम गायब होने का दावा किया गया था। अलग-अलग खाताधारकों की शिकायतें सामने आने के बाद अनुमानित रकम में बदलाव हो रहा है। वास्तविक नुकसान कितना हुआ, कितने खाते प्रभावित हैं और कितनी रकम दूसरे खातों में भेजी गई, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

पुलिस को लगभग 10 अतिरिक्त शिकायती पत्र मिलने की भी जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी खातों के लेनदेन का रिकॉर्ड जुटाना और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़ना है। The Daily Jagran +2

21 खाताधारकों की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा

मामले की शुरुआत खाताधारक श्रीचंद की शिकायत से हुई थी। उनकी शिकायत के आधार पर बुधवार को बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 21 खाताधारकों की जमा रकम और एफडी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से निकालकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।

शिकायत में 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम प्रभावित होने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद दूसरे खाताधारकों ने भी बैंक में पहुंचकर अपने खातों की जांच कराई और पुलिस के सामने शिकायतें रखीं।

पुलिस ने अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत आपराधिक विश्वासघात से संबंधित आरोप भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि खातों से रकम किस प्रक्रिया के जरिए निकाली गई और किन लोगों की इसमें भूमिका रही।

बैंक के पांच कर्मचारियों पर कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब नेशनल बैंक प्रबंधन ने शाखा के तत्कालीन प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की कार्रवाई की है। बैंक स्तर पर विभागीय विजिलेंस जांच भी शुरू की गई है।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, शाखा में कथित अनियमितताओं की भनक बैंक के उच्चाधिकारियों को पहले ही लग गई थी। इसके बाद आंतरिक स्तर पर जांच कराई गई थी। शुरुआती जांच में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

हालांकि, केवल निलंबन को दोष साबित होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। जांच में प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका, बैंकिंग सिस्टम में इस्तेमाल किए गए लॉगिन और पासवर्ड तथा लेनदेन की मंजूरी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है।

CBI जांच से खुल सकते हैं हेराफेरी के बड़े राज

मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसी का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितता की पूरी प्रक्रिया को समझना, संदिग्ध लेनदेन का पता लगाना और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करना होगा।

जांच के दौरान बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, एफडी बंद करने से संबंधित दस्तावेज, खाते में किए गए बदलाव और कर्मचारियों के लॉगिन विवरण महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और क्या इसे अलग-अलग चरणों में दूसरे बैंक खातों तक पहुंचाया गया। यदि किसी ग्राहक की अनुमति के बिना लेनदेन किया गया है तो उसकी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करना जांच का अहम हिस्सा होगा।

बैंक ने तीन ग्राहकों को लौटाए 43 लाख रुपये

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाब नेशनल बैंक की ओर से ग्राहकों को राहत देने वाली जानकारी भी सामने आई है। बैंक ने बताया कि अब तक तीन ग्राहकों के दावों का निपटारा करते हुए कुल 43 लाख रुपये वापस किए जा चुके हैं। बैंक का कहना है कि जिन ग्राहकों की शिकायतें जांच में सही पाई जाएंगी, उनके वास्तविक दावों का भुगतान किया जाएगा।

बैंक ने यह भी कहा है कि वह संबंधित जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। मामले में जिन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैंक प्रबंधन ने वित्तीय अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। Moneycontrol +1

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

इस घटना के बाद बैंकिंग विशेषज्ञों की ओर से भी खाताधारकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। यदि किसी ग्राहक को अपने खाते में जमा रकम कम दिखाई देती है या कोई ऐसा ट्रांजेक्शन नजर आता है, जिसकी अनुमति उसने नहीं दी है, तो उसे तुरंत बैंक को लिखित शिकायत देनी चाहिए।

प्रभावित खाताधारकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

* अपने बचत खाते और एफडी का पूरा स्टेटमेंट प्राप्त करें।

* संदिग्ध लेनदेन की तारीख, रकम और विवरण सुरक्षित रखें।

* बैंक में लिखित शिकायत देकर उसकी प्राप्ति रसीद जरूर लें।

* खाते से जुड़े एसएमएस, ईमेल और अन्य अलर्ट सुरक्षित रखें।

* जरूरत पड़ने पर पुलिस और संबंधित बैंकिंग शिकायत निवारण व्यवस्था से संपर्क करें।

* किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।

यदि बैंक स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो ग्राहक भारतीय रिजर्व बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत भी शिकायत दर्ज कराने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।

जांच के बाद सामने आएगी असली रकम

ग्रेटर नोएडा के पीएनबी की ऐच्छर शाखा से जुड़ा यह मामला अब केवल कुछ खाताधारकों की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। 350 से अधिक ग्राहकों के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा और आंतरिक निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ग्राहकों की अनुमति के बिना कथित तौर पर रकम दूसरे खातों में कैसे पहुंची? यदि बैंक के आंतरिक नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में खामियां थीं, तो उनकी जिम्मेदारी किसकी होगी? साथ ही, जिन लोगों की जीवनभर की बचत प्रभावित हुई है, उन्हें उनकी पूरी रकम कब तक वापस मिलेगी?

फिलहाल पुलिस, बैंक प्रबंधन और केंद्रीय जांच एजेंसी की पड़ताल से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। खाताधारकों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और उनकी मेहनत की कमाई जल्द वापस मिलेगी।

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