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सोने-चांदी की 1250 श्रीराम शिलाओं के गायब होने के आरोप से मचा बवाल, चंपत राय बंसल पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश : अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित तौर पर 1250 सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से निर्मित श्रीराम शिलाओं के गायब होने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर पूर्व कार सेवक और धर्मसेना से जुड़े संतोष दुबे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि […]

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  • June 20, 2026 6:30 pm IST, Published 2 hours ago

उत्तर प्रदेश : अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित तौर पर 1250 सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से निर्मित श्रीराम शिलाओं के गायब होने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर पूर्व कार सेवक और धर्मसेना से जुड़े संतोष दुबे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्षों पहले देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या पहुंची बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिलाओं के गायब होने की जवाबदेही तय होनी चाहिए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

चंपत राय का पूरा नाम चंपत राय बंसल है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना कस्बे (सरायमीर मोहल्ला) के रहने वाले हैं। वह विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं।और राम मंदिर निर्माण से संबंधित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसके अलावा वे विश्व हिंदू परिषद में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

संतोष दुबे का दावा है कि वर्ष 1989 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश और विदेश से श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी संख्या में श्रीराम शिलाएं अयोध्या भेजी गई थीं। इनमें सामान्य पत्थरों के अलावा सोने, चांदी, हीरे तथा अष्टधातु से बनी विशेष शिलाएं भी शामिल थीं। उनका आरोप है कि इन बहुमूल्य शिलाओं का वर्तमान में कोई स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल खड़े किए हैं।

एक टीवी चैनल की बहस में संतोष दुबे ने कहा कि यदि इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय पर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार ट्रस्ट को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि इन शिलाओं का रिकॉर्ड कहां है और उनका वर्तमान उपयोग या संरक्षण किस स्थिति में है।

दूसरी ओर, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि मंदिर निर्माण और उससे संबंधित सभी गतिविधियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित की जा रही हैं। ट्रस्ट पहले भी विभिन्न आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका दावा है कि सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे और अन्य वस्तुओं को लेकर भी कई तरह के आरोप सामने आए थे, जिन पर ट्रस्ट ने स्पष्टीकरण देते हुए उन्हें निराधार बताया था।

इस विवाद के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने मामले में पारदर्शिता की मांग उठाई है, जबकि राम मंदिर समर्थक संगठनों का कहना है कि बिना ठोस सबूत किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि किसी को कोई शंका है तो वह संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराए।

धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इससे जुड़े हर विवाद का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है। ऐसे में आरोप और प्रत्यारोप की राजनीति के बजाय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्षों को भी स्पष्ट जानकारी देकर भ्रम की स्थिति समाप्त करनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला आरोपों और जवाबी दावों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस संबंध में किसी प्रकार की जांच या कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है। श्रद्धालु और आम जनता भी इस पूरे प्रकरण में स्पष्टता और पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि राम मंदिर से जुड़ी किसी भी प्रकार की शंका का समाधान हो सके।

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