लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र आज, 30 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र में दोनों सदनों विधान सभा और विधान परिषद में मुख्य रूप से ‘नारी सशक्तीकरण’ विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना और इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर व्यापक विमर्श करना है।
सत्र के दौरान सत्ता पक्ष का फोकस विशेष रूप से ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। लोकसभा में इस विधेयक के पारित न हो पाने को लेकर सरकार विपक्ष पर सवाल उठाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल इस विषय को आधार बनाकर विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करेगा और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके रुख को लेकर सवाल करेगा।
इस विशेष सत्र की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें प्रश्नकाल शामिल नहीं किया गया है। यानी सदस्यों द्वारा सरकार से औपचारिक प्रश्न पूछने की प्रक्रिया नहीं होगी। इसके स्थान पर केवल औपचारिक कार्य संपन्न किए जाएंगे और उसके बाद पूरा सत्र एक ही विषय नारी सशक्तीकरण पर केंद्रित अनवरत चर्चा को समर्पित रहेगा। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस विषय पर विस्तृत और केंद्रित बहस चाहती है, जिसमें विभिन्न दलों के विचार सामने आ सकें।
इससे पहले बुधवार की शाम विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में विशेष सत्र की कार्यवाही का प्रारूप तय किया गया। समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा और पूरे दिन की कार्यवाही केवल निर्धारित विषय पर चर्चा तक ही सीमित रहेगी। कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र महिला सशक्तीकरण से जुड़े नीतिगत और राजनीतिक पहलुओं पर केंद्रित रहने वाला है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।