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दीपों की रोशनी से नहाएगा सारनाथ का मूलगंधकुटी मंदिर, बुद्ध पूर्णिमा की भव्य तैयारी

वाराणसी: सारनाथ, जो भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली के रूप में विश्वभर में प्रतिष्ठित है, एक बार फिर बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आध्यात्मिक रंग में रंगने जा रहा है। इस वर्ष भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती बैशाख बुद्ध पूर्णिमा एक मई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह अवसर न केवल […]

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  • April 30, 2026 10:29 am IST, Published 1 hour ago

वाराणसी: सारनाथ, जो भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली के रूप में विश्वभर में प्रतिष्ठित है, एक बार फिर बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आध्यात्मिक रंग में रंगने जा रहा है। इस वर्ष भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती बैशाख बुद्ध पूर्णिमा एक मई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह अवसर न केवल बौद्ध अनुयायियों के लिए बल्कि शांति, करुणा और मानवता के संदेश में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस विशेष पर्व को लेकर सारनाथ स्थित विभिन्न बौद्ध मंदिरों में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। पूरे परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। मंदिरों को पंचशील झंडों से अलंकृत किया गया है, जो बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रतीक हैं। साथ ही रंग-बिरंगी बिजली की झालरों से पूरे क्षेत्र को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। शाम ढलते ही जब ये रोशनियां जगमगाएंगी, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठेगा। धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष भी मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। एक मई की सुबह 6:30 बजे से 11 बजे तक भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अवसर प्रदान किया जाएगा। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आस्था से भरा होगा, जब वे बुद्ध के पवित्र अवशेषों के समक्ष नमन करेंगे।

कार्यक्रमों की श्रृंखला यहीं समाप्त नहीं होगी। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक मूलगंध कुटी विहार परिसर में धम्म सभा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बौद्ध धर्म के उपदेशों, सिद्धांतों और उनके आधुनिक जीवन में महत्व पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिनमें बौद्ध परंपराओं और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके बाद अपराह्न 3 बजे कचहरी से सारनाथ तक एक भव्य धम्म यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में भिक्षु, श्रद्धालु और अनुयायी शामिल होंगे। यह यात्रा बुद्ध के शांति और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रतीक होगी और  इसमें बौद्ध विद्वान और भिक्षु बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और मानव कल्याण के संदेशों पर प्रकाश डालेंगे। पूरा सारनाथ इस दिन आध्यात्मिकता, शांति और भक्ति के वातावरण में डूबा रहेगा, जो हर आगंतुक को एक अनोखा अनुभव प्रदान करेगा।

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