• होम
  • उत्तराखंड
  • चारधाम यात्रा: ऋषिकेश में श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य, 1000 से अधिक की जांच

चारधाम यात्रा: ऋषिकेश में श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य, 1000 से अधिक की जांच

उत्तराखंड में शुरू हुई चारधाम यात्रा के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही देखने को मिल रही है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। खासतौर पर ऋषिकेश में तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य जांच की व्यापक व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी श्रद्धालु बिना […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • April 26, 2026 6:01 pm IST, Published 2 hours ago

उत्तराखंड में शुरू हुई चारधाम यात्रा के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही देखने को मिल रही है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। खासतौर पर ऋषिकेश में तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य जांच की व्यापक व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी श्रद्धालु बिना जरूरी जांच के कठिन पहाड़ी यात्रा पर न निकले।

चारधाम यात्रा प्रशासन के अनुसार, यात्रा पर निकलने से पहले श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसके तहत ऋषिकेश में ट्रांजिट कैंप स्थापित किए गए हैं, जहां मेडिकल टीमें लगातार लोगों की जांच कर रही हैं। अब तक एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और जरूरतमंदों को उपचार भी उपलब्ध कराया गया है।

प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को पहले से स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें खास तौर पर यह सलाह दी गई है कि यदि किसी को चक्कर आना, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या सिरदर्द जैसी समस्या हो, तो वह तुरंत मेडिकल टीम से संपर्क करे और जांच करवाए।

ऋषिकेश में पांच मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं, जो विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं की जांच कर रही हैं। इन जांचों में ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और अन्य जरूरी स्वास्थ्य मानकों की जांच शामिल है। साथ ही, ओपीडी सेवाओं के माध्यम से बीमार श्रद्धालुओं को दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर श्रद्धालु घुटनों और कमर दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, सांस संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग भी जांच के लिए आ रहे हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को विशेष निगरानी में रखा जा रहा है और उन्हें समय पर दवा लेने की सलाह दी जा रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि जिन श्रद्धालुओं को सांस की बीमारी है, उन्हें धीरे-धीरे और रुक-रुक कर यात्रा करनी चाहिए। वहीं, बीपी और शुगर के मरीजों को सलाह दी गई है कि वे अपनी स्थिति नियंत्रित होने के बाद ही यात्रा शुरू करें।

प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी पूरी यात्रा पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के कारण यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल रही है।

चारधाम यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह शारीरिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में समय रहते स्वास्थ्य जांच और सावधानियां अपनाना हर श्रद्धालु के लिए जरूरी है, ताकि उनकी यात्रा सुखद और सुरक्षित बन सके।

Advertisement