सामान्य प्रसव होगा अब दर्दमुक्त

दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में ‘एपिड्यूरल एनाल्जेसिया’ की सुविधा, जानें इसके फायदे नई दिल्ली: प्रसव के दौरान होने वाली असहनीय पीड़ा अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय नहीं रहेगी। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक ‘एपिड्यूरल एनाल्जेसिया’ (Epidural Analgesia) के माध्यम से अब प्रसव पीड़ा को काफी हद तक कम करना संभव हो […]

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  • July 5, 2026 9:53 am IST, Published 1 hour ago

दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में ‘एपिड्यूरल एनाल्जेसिया’ की सुविधा, जानें इसके फायदे

नई दिल्ली: प्रसव के दौरान होने वाली असहनीय पीड़ा अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय नहीं रहेगी। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक ‘एपिड्यूरल एनाल्जेसिया’ (Epidural Analgesia) के माध्यम से अब प्रसव पीड़ा को काफी हद तक कम करना संभव हो गया है। दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं सुचेता कृपलानी अस्पताल में यह सुविधा महिलाओं को पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

क्या है एपिड्यूरल एनाल्जेसिया?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक प्रसव पीड़ा के प्रबंधन का “गोल्ड स्टैंडर्ड” मानी जाती है। इसमें:

  • रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में एक पतली नली (कैथेटर) डालकर दर्द निवारक दवा दी जाती है।

  • इससे प्रसव का दर्द कम हो जाता है, लेकिन महिला पूरी तरह सचेत और होश में रहती है

  • महिला प्रसव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकती है और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन कर सकती है।

अस्पताल में मिल रही है बड़ी राहत

लेडी हार्डिंग अस्पताल में प्रतिदिन 5 से 10 महिलाओं को यह सुविधा दी जा रही है। एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. रंजना बिस्वास का कहना है कि हर महिला को दर्द रहित प्रसव का अधिकार मिलना चाहिए। अस्पताल प्रशासन की इस पहल से प्रसव प्रक्रिया न केवल आसान, बल्कि अधिक सकारात्मक और सम्मानजनक हो गई है।

क्यों है यह तकनीक खास?

  • भय से मुक्ति: अक्सर महिलाएं प्रसव पीड़ा के डर से सिजेरियन (C-Section) का विकल्प चुनती हैं, लेकिन एपिड्यूरल की उपलब्धता से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे ‘नॉर्मल डिलीवरी’ को प्राथमिकता दे रही हैं।

  • कम तनाव: दर्द कम होने से प्रसव के दौरान होने वाला तनाव और घबराहट कम हो जाती है।

  • रिकवरी: सामान्य प्रसव शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें सिजेरियन के मुकाबले रिकवरी तेजी से होती है और ऑपरेशन के जोखिम भी कम रहते हैं।

अभी भी है जागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में महिलाएं इस तकनीक के बारे में नहीं जानतीं। इसके अलावा, इस सेवा के लिए प्रशिक्षित एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है, जिसके कारण यह सुविधा अभी सीमित अस्पतालों में ही उपलब्ध है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में इस सेवा का विस्तार किया जाए, तो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।

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