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ई-20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का सच

 सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण, जानें आपके हर सवाल का जवाब नई दिल्ली: देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर छिड़ी बहस और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक दावों पर केंद्र सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए […]

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  • July 5, 2026 6:01 am IST, Published 15 minutes ago

 सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण, जानें आपके हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली: देशभर में ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर छिड़ी बहस और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक दावों पर केंद्र सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए आम जनता के मन में उठ रहे तमाम सवालों के जवाब दिए हैं और ई-20 ईंधन को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।

विवाद की शुरुआत और सरकार की सफाई

ई-20 को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल के एक बयान को ‘प्रयोग’ के दौर से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया गया। बाद में स्पष्ट किया गया कि उनका आशय इथेनॉल की आपूर्ति व्यवस्था से था, न कि ईंधन की गुणवत्ता के परीक्षण से। अब मंत्रालय ने बिंदुवार तरीके से दावों का खंडन किया है।

प्रमुख सवालों पर सरकार का जवाब (FAQs)

  • क्या माइलेज कम होता है? सरकार ने स्वीकार किया कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत की मामूली गिरावट संभव है।

  • क्या इंजन खराब होता है? मंत्रालय का कहना है कि संयुक्त परीक्षणों में इंजन, धातु या प्लास्टिक के पुर्जों को कोई गंभीर नुकसान नहीं पाया गया है। केवल पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को सामान्य से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

  • बीमा और वारंटी पर असर? ई-20 के लिए डिजाइन की गई गाड़ियों पर वारंटी और बीमा पहले की तरह पूरी तरह लागू रहेंगे।

  • गन्ने का रस या चींटियां? सरकार ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार होता है, इसमें न तो गन्ने का रस होता है और न ही इसमें चीनी का अंश होता है, जिससे चींटियों या कीड़ों का कोई सवाल ही नहीं उठता।

  • पानी की खपत? 1 लीटर इथेनॉल में 10,000 लीटर पानी खर्च होने का दावा गलत है। डिस्टिलरी में प्रति लीटर उत्पादन के लिए मात्र 3-5 लीटर प्रसंस्कृत पानी लगता है, जिसे रिसाइकिल किया जाता है।

सरकार को क्या है फायदा?

सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके माध्यम से:

  1. विदेशी मुद्रा की भारी बचत: 2014-15 से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत।

  2. किसानों की आय: किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान।

  3. पर्यावरण संरक्षण: कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट।

  4. लक्ष्य प्राप्ति: दिसंबर 2025 तक का 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया गया है।

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